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युवाचार्य श्री का जीवन निर्मल गंगा के समान उज्ज्वल है
साध्वी कुंदनरेखा जी के सान्निध्य में 'युवाचार्य वंदना' समारोह हर्षोल्लास के वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक अशोक गोयल भी उपस्थित रहे। साध्वी कुंदनरेखा जी ने अपने विचारों की प्रस्तुति देते हुए कहा, 'गौरवशाली जैन शासन की गौरवशाली परम्परा को नमन! तेरापंथ का इतिहास अनेक कीर्तिमानों का समवाय है। मर्यादा और अनुशासन से सुसज्जित इस धर्म संघ में एक आचार्य की आज्ञा सर्वोपरि है, वंदनीय है। उसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण ने अपने उत्तराधिकार की चादर युवाचार्य महावीर कुमार जी को जैसे ही ओढ़ाई, पूरे धर्मसंघ में खुशियों का सैलाब उमड़ने लगा। सचमुच वह मनमोहक दृश्य अविस्मरणीय बन गया। आचार्यप्रवर एवं युवाचार्य प्रवर गुणों के भंडार हैं। आपका संयम, समता और उपशम अनुत्तर है। वर्तमान युग में उत्कृष्ट वैराग्य देख सब नतमस्तक हैं। यह युगल जोड़ी अमर रहे। धर्मसंघ अपने प्रभु के अनुशासन में निरन्तर आध्यात्मिक विकास करता रहे, हम यही शुभ कामना करते हैं।'
साध्वी सौभाग्ययशाजी ने कहा, 'युवाचार्य प्रवर का जीवन निर्मल गंगा के समान उज्ज्वल है। युवाचार्य प्रवर की साधना अनुत्तर है। युवाचार्य प्रवर की विनम्रता एवं समर्पण बेजोड़ है। उत्कृष्ट वैराग्य, सहिष्णुता एवं गुरु भक्ति अनुत्तर है। हम सौभाग्यशाली हैं कि आचार्यप्रवर की सूक्ष्म निगाहों ने कोहिनूर हीरे को परम संघ का सर्वोच्च बना दिया। गुरुदेव एवं युवाचार्य की जोड़ी हमेशा संघ की सारणा-वारणा करती रहे और हम सभी आज्ञा अनुसार अपने संयम जीवन को सुदृढ़ करते रहें।' साध्वी कल्याणयशाजी ने कहा, 'महावीर मुनि को मुख्य मुनि और युवाचार्य प्रवर के रूप में देखकर हम आनंदित हैं, पुलकित हैं। यह सब आचार्य प्रवर की दूरदृष्टि और कृपा का प्रसाद है। आज पूरा धर्मसंघ अपने गुरु की अभ्यर्थना में तल्लीन है, क्योंकि गुरुदेव ने संघ को युवाचार्य महावीर जैसे युवा मनीषी की उद्घोषणा कर एक नये इतिहास का सृजन किया है। शतशः नमन!