तेरापंथ स्थापना दिवस, गौरवशाली इतिहास

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गांधीनगर, बेंगलुरु।

तेरापंथ स्थापना दिवस, गौरवशाली इतिहास

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा एवं गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित धर्मसभा में साध्वी पावनप्रभाजी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में गुरु की महिमा एवं तेरापंथ धर्मसंघ के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा का यह दिन केवल गुरु पूर्णिमा ही नहीं, बल्कि तेरापंथ धर्मसंघ के जन्मदिवस के रूप में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूसरे शब्दों में कहें तो आज के ही दिन तेरापंथ को अपना गुरु प्राप्त हुआ। तेरापंथ को ऐसे गुरु मिले, जिनमें गरिमा, गौरव एवं गुरुत्व का अद्भुत समन्वय था। आचार्यश्री भिक्षु ने अपने गुरु से यह आशीर्वाद प्राप्त किया कि मुनि भीखण वटवृक्ष की शाखाओं की भाँति निरंतर विकसित एवं विस्तारित होता रहे।
साध्वीश्री ने कहा कि तेरापंथ की एक विशिष्ट पहचान यह है कि यहाँ दीक्षा पूर्ण परीक्षण एवं कसौटी पर परखने के उपरांत ही प्रदान की जाती है। स्वयं आचार्यश्री भिक्षु ने भी तीनों बहनों को विभिन्न कसौटियों पर परखकर दीक्षित किया था। गुरु की महिमा अपरम्पार है। उनके अनगिनत गुणों का वर्णन शब्दों में कर पाना अत्यंत कठिन है। हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि हमें ऐसे महान गुरु का सान्निध्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। कार्यक्रम में साध्वी आत्मयशाजी एवं साध्वी उन्नतयशाजी ने भी अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। साध्वीश्री रम्यप्रभाजी ने कविता के माध्यम से प्रभावशाली प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा, गांधीनगर के अध्यक्ष प्रकाश बाबेल ने सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर महासभा उपाध्यक्ष श्री प्रकाश लोढ़ा, युवक परिषद अध्यक्ष विनोद कोठारी, महिला मंडल अध्यक्षा लक्ष्मी बोहरा की उपस्थिति रही।