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संघ की Greatness का आधार है एक गुरु और एक विधान
आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी शिष्या डॉ. साध्वी परमयशाजी के सान्निध्य में 'अभिनन्दन एक प्रकाश पुंज का (267वां तेरापंथ स्थापना दिवस)' के कार्यक्रम का समायोजन हुआ। डॉ. साध्वी परमयशाजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी ने पूछा - तेरापंथ कब तक चलेगा? जब तक मेरे साधु साध्वी आचार विचार मर्यादा निष्ठा रहेंगे। तब तक इस शासन का कोई बाल बांका नहीं कर सकता। इस संघ की Greatness का आधार है एक गुरु और एक विधान। आर्य भिक्षु समयज्ञ, तत्वज्ञ, जैन आगमों के मर्मज्ञ विशेषज्ञ थे अध्यात्म के महान ज्ञाता थे। नॉलेज के लिए कॉलेज में नहीं गए पर 38 हजार पद साहित्य का सृजन करके कीर्तिमान बना दिया। नालन्दा विश्व विद्यालय के डायरेक्टर सतकौदी मुखर्जी ने भिक्षु दर्शन को पढ़ने के बाद टिप्पणी करते हुए कहा - आचार्य भिक्षु का जन्म मारवाड़ कंटालिया में हुआ। अगर जर्मनी में जन्म होता तो महान विचारक कांट सें भी उनका मूल्य ज्यादा होता। आज आषाढ़ी पूनम है। शुभ मुहूर्त शुभ पल शुभ वक्त शुभ दिन है। सायं 7:25 गोधूली बेला में आचार्य भिक्षु ने भाव संयम स्वीकार किया। तब से हमें यह तेरापंथ धर्मसंघ मिला। डॉ. साध्वी परमयशाजी, साध्वी विनययशा जी, साध्वी मुक्ताप्रभा जी और साध्वी कुमुदप्रभा जी ने 'अंधेरी ओरी' के कार्यक्रम की सुंदर प्रस्तुति दी और 'तेरापंथ सभा द्वारा कार्यक्रम का मंगलाचरण किया गया और भिक्षु प्रणति में शब्द चित्र के माध्यम से 11 श्रावकों ने अपने भावों की अभिव्यक्ति दी। ओरी में श्री भिक्षु ने अलख जगायी रे' गीत की सुंदर प्रस्तुति दी। तेरापंथ सभाध्यक्ष श्रीमान् नेमीचंदजी पोरवाड ने अपने भावों की अभिव्यक्ति दी।