यह तपस्या का मौसम है

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सिंकदराबाद।

यह तपस्या का मौसम है

सिंकदराबाद। प्रेरक उद्बोधन देते हुए मुनि दीप कुमारजी ने कहा कि, 'जैसे श्रावण का महीना वर्षा ऋतु का प्रतीक है, वैसे ही यह तपस्या का भी श्रेष्ठ मौसम है। जैन धर्म में तप का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इतिहास में अनेक महान तपस्वियों ने तप के माध्यम से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। तपस्या वही कर सकता है जिसमें दृढ़ मनोबल, साहस और आत्मविश्वास हो। आज के समय में, जब चारों ओर स्वादिष्ट व्यंजनों का आकर्षण है, ऐसे वातावरण में आठ दिन तक निराहार रहकर तप करना वास्तव में आत्मशक्ति का अद्भुत उदाहरण है।' उन्होंने आगे कहा कि 'तपस्या कभी भी किसी दबाव या दिखावे के लिए नहीं होती। यह पूर्णतः स्वेच्छा से, केवल कर्मों की निर्जरा और आत्मशुद्धि के उद्देश्य से की जाती है। गुरु कृपा से आज सिकंदराबाद के तेरापंथ भवन में एक साथ आठ अठाई तपस्याओं का शुभारंभ हुआ है। आशा है कि भविष्य में भी तपस्या के ऐसे अनुपम उपहार समाज को निरंतर प्राप्त होते रहेंगे।' मुनि काव्य कुमारजी ने भी तप की महिमा पर प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए।