‘चेंज योर थॉट्स’ कार्यशाला का आयोजन

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‘चेंज योर थॉट्स’ कार्यशाला का आयोजन

साध्वीश्री संयमलता जी के पावन सान्निध्य में प्रेरणादायी ‘चेंज योर थॉट्स’ कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ भवन में किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ साध्वीश्री द्वारा नवकार महामंत्र के मंगल उच्चारण से हुआ। साध्वी रौनकप्रभा जी ने सकारात्मक विचारों की महत्ता बताते हुए कहा कि हमारे विचार ही हमारी प्रतिक्रियाओं और व्यवहार को दिशा देते हैं। जैसे विचार होंगे, वैसी ही हमारी प्रतिक्रिया होगी। सकारात्मक सोच हमें विपरीत परिस्थितियों में भी संतुलित रहने और जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा देती है। साध्वी मार्दवश्री जी ने कुशल संचालन करते हुए कहा— 'दुनिया हर पल रंग बदलती है और यह रंग हमारे थॉट्स पर निर्भर करता है। थॉट्स पॉजिटिव हों तो दुनिया रंगीन और नेगेटिव हों तो वही दुनिया बेरंग नजर आती है।' उन्होंने सरल एवं रोचक शैली में विचारों और दृष्टिकोण के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को समझाया। साध्वीश्री संयम लता जी ने ‘चेंज योर थॉट्स’ विषय पर अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि हमारे जीवन में होने वाले परिवर्तन की जड़ हमारे विचार हैं। परिस्थितियों, स्थान या लोगों को बदलने के बजाय यदि हम अपनी सोच और दृष्टिकोण को बदलें, तो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आने लगता है। उन्होंने रिश्तों के संदर्भ में अत्यंत सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि हर रिश्ता हमसे कुछ अपेक्षा रखता है और रिश्तों को मधुर बनाए रखने के लिए कभी-कभी स्वयं को झुकाना भी पड़ता है। यदि हम कौशल्या जैसी सास चाहते हैं, तो पहले हमें यह देखना होगा कि हम स्वयं सीता जैसे गुण अपने भीतर रखते हैं या कैकेयी जैसे। यदि हम राम जैसा जीवनसाथी चाहते हैं, तो हमें आत्मचिंतन करना होगा कि हमारे विचार कहीं रावण जैसे तो नहीं हैं। उन्होंने ‘गोल्ड’ और ‘गोल्ड प्लेटेड’ का उदाहरण देते हुए कहा कि हर किसी को शुद्ध सोना पसंद आता है, गोल्ड प्लेटेड नहीं। उसी प्रकार दिखावटी नहीं, बल्कि शुद्ध एवं सकारात्मक विचारों वाला व्यक्तित्व ही वास्तव में सबको प्रिय लगता है। साध्वीश्री ने विभिन्न प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से बाल्यावस्था से युवावस्था तथा युवावस्था से वृद्धावस्था तक विचारों में आने वाले बदलावों को समझाया। उन्होंने विशेष रूप से युवा पीढ़ी को अपनी सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा दी।