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पैंसठिया छंद का सुंदर एवं भव्य आयोजन
आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वी राकेशकुमारीजी आदि ठाणा –४ के सान्निध्य में पैंसठिया छंद अनुष्ठान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। साध्वी राकेश कुमारीजी नें नमस्कार महामंत्र से कार्यक्रम की सुरुवात की। साध्वी मलयविभाजी, साध्वी विपुलयशाजी व साध्वी चेतस्वीप्रभाजीने मंगलाचरण किया। साध्वी राकेशकुमारीजी ने श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा- तू ही है अपने भाग्य का निर्माता विषय को स्पष्ट करते हुए पैंसठिया मंत्र यंत्र छंद के बारे में जानकारी दी। साध्वीश्री ने कहा आप सभी के जीवन में कोई न कोई समस्या, दुःख, तनाव परिवार में क्लेश, व्यापार में बाधा, सेहत की अव्यस्थता आदि ये सब क्यों ? साध्वीश्री ने कहा कहीं ना कहीं हमारे कर्म और ग्रह दोष बधाएं उपस्थित कर रहे हैं।
जैन शासन में पैंसठिया यंत्र छंद का बहुत बड़ा महत्वपूर्ण स्थान रहा है। ये पैंसठ पदों की स्तुती मंत्र है इसमें 24 तीर्थंकर, गणधर, आचार्य, उपाध्याय, जैन साधुओं को वंदन किया गया है। जैन आगमो में बताया गया है जिस घर में पैंसठिया छन्द का जाप होता है वहां नकारात्मक उर्जा नहीं टिकती। इससे कर्मो की निर्जरा भी होती है। इसने आत्मा पर आया हुआ कर्मों का आवरण हटता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इसकी उपयोगिता सिद्ध होती है। जब हम सामूहिक रूप में लय के साथ मंत्र का उच्चारण करते है तो हमारे शरीर के अन्दर और बाहर वाइब्रेशन बनता है। यह वाइब्रेशन मन को शांत, वातावरण को पवित्र करता है। जब समूह में लयबद्ध गाते हैं तो 100 गुणा उर्जा बढ़ जाती है। इससे व्यक्ति को तीन लाभ की प्राप्ति होती है, आज के परिवेश में पहला लाभ- शांति व उर्जा की प्राप्ति होती है मन शांत होता है। निर्णायक शक्ति का विकास होता है। बान्द्रा, सांताक्रुज, खार, अँधेरी, पार्ला, जोगेश्वरी, के श्रावक श्राविकाओं ने उत्साह से भाग लिया।