विचार अनेक, मंजिल एक-संत समागम का संदेश

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राजराजेश्वरी नगर।

विचार अनेक, मंजिल एक-संत समागम का संदेश

स्वामी मधुसूदनानन्द पुरी (पीठाधिपति/सर्वाधिकारी) ॐकार आश्रम महासंस्थान ट्रस्ट के पूज्य महाराज श्री तेरापंथ भवन पधारे। इस अवसर पर युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि आकाश कुमार जी ठाणा-2 के साथ उनका आध्यात्मिक मिलन एवं परस्पर संवाद हुआ। मुनिश्री ने कहा आचार्यप्रवर की अहिंसा यात्रा के 3 मुख्य उद्देश्यों में से एक उद्देश्य था सद्भावना का विकास। स्वामी मधुसूदनानन्द पुरी ने पूर्व में भी गुरुदेव के बेंगलुरु आगमन पर केंगेरी में स्वागत किया था। आप समय समय पर जैन मुनियों से मिलते रहते हैं। भारतवर्ष में ऋषि-मुनि परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमने इस ऋषि-मुनियों की धरती पर जन्म लिया। आज भी विज्ञान रिसर्च करता है, रिसर्च का अर्थ है जो पूर्व में रहा है उसको पुनः खोजना। व्यक्ति को सदैव सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। नकारात्मकता आगे बढ़ने के राह में अवरोध उत्पन्न करती है। स्वामी मधुसूदनानन्द पुरी ने राजराजेश्वरी नगर को देवी मां के वरदान से विकसित भूमि बताया। उन्होंने कहा अलग-अलग विचारधाराओं को ही दर्शन कहते हैं। मंजिल सबकी एक ही है– मोक्ष। इसके लिए सबसे पहले हमें स्वयं को जानना होगा और उसे जानने का मार्ग ही सन्मार्ग है। और यह सत्संग से ही प्राप्त होता है। ऋषि परम्परा ज्ञान की मशाल को लेकर चल रही है। धर्म का असर अर्थ है way of life अर्थात कैसे जीवन का सदुपयोग करें। तथास्तु ग्रुप के जितेन्द्र कोठारी ने कहा तथास्तु ग्रुप धर्म को साथ लेकर चलने वालों का ग्रुप है जो समय समय पर ऐसे संत समागम के अवसर बनाने का प्रयास करता रहता है। महामण्डलेश्वर मधुसूदनानन्द पुरी स्वामी जी अति सरल स्वभाव वाले हैं तथा शास्त्र ज्ञान को महत्व देते हैं। सभाध्यक्ष कमलसिंह दुगड़, तेयुप अध्यक्ष सरल पटावरी, मंत्री संदीप बैद, तेममं अध्यक्ष मंजु बोथरा आदि की अच्छी उपस्थिति रही। कुशल मंच संचालन मुनि हितेन्द्र कुमार जी ने किया।