संकल्प से संयम की ओर बढ़ते कदम

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बालोतरा।

संकल्प से संयम की ओर बढ़ते कदम

तेरापंथ सभा द्वारा आयोजित समारोह में उपस्थित विशाल जनमेदिनी को सम्बोधित करते हुए प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञा जी ने कहा- आज दीक्षार्थिनी रुचिका की अभिवन्दना की जा रही है, यह व्यक्तित्व की नहीं, उसके संकल्प शक्ति और वैराग्य की अभि-वन्दना है। इसका मुमुक्षु से संयमी जीवन की ओर प्रस्थान हो रहा है। आज इसके अभिभावक माता-पिता निश्चितता की अनुभूति कर रहे हैं। क्योंकि तेरापंथ धर्मसंघ एक गुरुनिष्ठ मर्यादित धर्म संघ है। इस संघ में हर सदस्य आमरण निश्चित रहता है। आत्मिक आहलाद का अनुभव करता है। साध्वी श्री ने कहा- दुःख मुक्ति के इस मार्ग पर चरणन्यास करने वाला शाश्वत सुख का अनुभव करता है। परिषद को विशेष प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा- सिवांची मालानी उर्वरा भूमि है। भाग्योदय से युवाचार्य प्रवर और साध्वी वर्या इस भूमि के दो नक्षत्र संघ गगन में चमक रहे है। अभिभावक गण अपनी संतान रुपी पुष्प को श्री चरणों में समर्पित करें, संघ सम्पदा को बढ़ाए और पूज्यवरों का स्वप्न साकार करे। दीक्षार्थी रुचिका के प्रति अपने उद्‌गार में कहा- श्रद्धा, समर्पण विनयभाव से निरन्तर प्रवर्धमान बनी रहे। साध्वी डॉ राजुल प्रभाजी ने कहा- रुचिका का अकम्प संकल्प दीप सदा प्रज्वलित रहे। साध्वी सुदर्शनप्रभा, साध्वी डॉ राजुल प्रभा, साध्वी डॉ चैतन्य प्रभा, साध्वी डॉ शौर्यप्रभा जी ने गीत का संगान कर आध्यात्मिक शुभकामना दीं। तेरापंथ सभा अध्यक्ष राणमल फोला मेहता ने दीक्षार्थी से रुचिका के संयम की अनुमोदना की। दीक्षार्थिनी रुचिका ने कहा- सोभाग्य से मेने तेरापंथ में प्रवेश किया, शक्तिशाली गुरु की चरण मिली, जिनके सान्निध्य में मुझे संयम जीवन मिलेगा। दीक्षार्थिनी के पिता रुपेश मालू ने कहा- मैं मंदिरमार्गी था, मुनि मोहनलालजी आमेट की प्रेरणा से मैंने धर्म के असली रूप को समझा, जीवन जागृत हुआ, तेरापंथ जैसे पवित्र संघ की शरण पायी, यह मेरा परम सोभाग्य है। मेरी पुत्री उस संघ में साधना के लिए प्रस्थान कर रही है यह मेरा अहोभाग्य है।