साधना और अष्टसंपदा के धनी - हमारे नवयुवराज प्रवर

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बीकानेर।

साधना और अष्टसंपदा के धनी - हमारे नवयुवराज प्रवर

तुलसी साधना केन्द्र में' युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी की सुशिष्या शासनश्री साध्वी मंजु प्रभाजी के सान्निध्य में नवमनोनीत युवाचार्य श्री महावीर मुनि के वर्धापना का कार्यक्रम आयोजित किया गया। साध्वी मंजुप्रभाजी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा- आचार्य अष्टसंपदा से युक्त होते है। हमारे नवयुवराज प्रवर श्री भी अष्टसंपदा से युक्त है। आचार्य प्रवर ने शुभ ग्रह नक्षत्र, शुभयोग, शुभमुहुर्त व शुभ क्षणों में युवाचार्य प्रवर की घोषणा करके सकल तेरापंथ धर्मसंध में खुशी का वातावरण बना दिया है। आपके इस चयन से धर्मसंध श्रद्धा प्रणत है। आचार्य प्रवर व युवाचार्य प्रवर की कुशल-अनुशासना में युग को नया दिशा बोध मिलेगा और धर्म संध विकास की नई ऊंचाईयों को छूएगा। साध्वी गुरुयशाजी ने इस अवसर पर कहा की भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य की परम्परा गौरवशाली रही है। रामायण, महाभारत में भी गुरु शिष्य का वर्णन आता है। तेरापंथ धर्मसंघ में भी गुरु-शिष्य की परम्परा गौरवशाली रही है। आचार्य अपने शिष्य पर स्पर्श, चिंतन व दर्शन से अपने तेजस्वी आभा मण्डल से शक्ति सम्प्रेषित करते है। साध्वी जयंतप्रभा जी ने कहा- 'अभी तो पर खुले है लम्बी उड़ान बाकी है, अभी तो चांद सितारों को ही मापा है, अनंत आसमान बाकी है। तेरापंथी सभा के अध्यक्ष सुरेश बैद, तेरापंथ महिला मंडल से लीलादेवी कोठारी ने अपने विचार रखे।