शक्ति को पहचानने का सशक्त  माध्यम नवकार मंत्र है

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उत्तर हावड़ा।

शक्ति को पहचानने का सशक्त माध्यम नवकार मंत्र है

युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेशकुमार जी ठाणा-3 के सानिध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के निर्देशन में मंत्रदीक्षा कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ युवक परिषद् उत्तर हावड़ा द्वारा योगक्षेम विहार के योगक्षेम सभागार में किया गया। जिसमें तेरापंथ युवक परिषद् दक्षिण हावड़ा, साउथ कोलकाता, पूर्वांचल, उत्तर कोलकाता, लिलुआ, हिन्दमोटर ने सहभागिता दर्ज की। गरिमामयी उपस्थिति अभातेयुप के उपाध्यक्ष प्रथम अनंत बागरेचा आदि की रही। मुनि जिनेशकुमार जी ने मंत्र दीक्षा के योग्य 37 बच्चों को नमस्कार महामंत्र के माध्यम से समझाते हुए मंत्र दीक्षा प्रदान की और बच्चों को संकल्प कराकर शिक्षा सूत्र प्रदान किये। मुनि श्री ने दीक्षान्त प्रवचन करते हुए कहा कि - आत्मा में अनंत शक्तियां निहित है। लेकिन राग, द्वेष, कषाय, अज्ञान, प्रमाद की सघनता के कारण मनुष्य अपनी शक्ति को पहचान नहीं पाता। शक्ति को पहचानने का एक सशक्त माध्यम मंत्र है। मंत्र साधना के द्वारा चित्त की एकाग्रता बढती है और एकाग्रता की स्थिति में अज्ञात‌ भी ज्ञात बन जाता है। मन को अहर्व मुखी वृत्तियों की ओर ले जाने वाली शब्दशक्ति मंत्र कहलाती है। मंत्रों में एक मंत्र है नवकार मंत्र। मंत्र दीक्षा का उद्देश्य -बच्चों को मंत्रों से परिचित कराना और उन के प्रयोग से होने वाले लाभ का अनुभव कराना। बच्चे संस्कारी होंगे तो अच्छे इंसान बनेंगी देव‌गुरु धर्म के प्रति आस्था रखने से व नशामुक्त जीवन जीने से व्याक्ति हमेशा समाधि में रहता है। इस अवसर पर अभातेयुप के उपाध्यक्ष प्रथम अनंत बागरेचा ने अपने विचार व्यक्त किए। स्वागत भाषण तेरापंथ युवक परिषद् उत्तर हावड़ा के अध्यक्ष बसंत पटावरी ने दिया । आभार ज्ञापन मंत्री विनीत भंसाली ने किया। संचालन मुनि परमानंद जी ने किया। कार्यशाला के प्रारंभ में बच्चों त्रिपदी वंदना कराई गई।