गणमाली के चरणों में, झुक-झुक करते हम वंदन

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शासन श्री साध्वी मंजूरेखा

गणमाली के चरणों में, झुक-झुक करते हम वंदन

अभिनन्दन, अभिनन्दन, अभिवन्दन, अभिवन्दन
गणमाली के चरणों में, झुक-झुक करते हम वंदन॥
शक्तिधर हो तुम गुरुवर, शक्ति सभी में भरते हो।
गण मन्दिर की मीनारों पर, आलेख नया नित लिखते हो।
झेलो-झेलो अभिनन्दन, चरणों में शत-शत वंदन॥
सूरत तेरी अति सुन्दर, मूरत भी मन हारी है।
सरल विवेचन से भरते, गुरु गुण निष्ठा एकतारी है।
रहो निरामय बढ़ते चरण, कण-कण में अभिनव पुलकन॥
महाश्रमण जी गुरुवर ने, हीरे का मूल्य बढ़ाया है।
खरी कसौटी कर-कर के, गण का ताज पहनाया है।
संकल्प सदा शुभ-शुभ हो, बन गए तुम गण की धड़कन॥
तुलसी महाप्रज्ञ आशीर्वर फलित-फलित है सब सपने।
हम सब मिल आनन्द मनाते, सचमुच भाग्य खिले अपने।
युवाचार्यवर के चरणों में, आत्म रमण के खिले सुमन॥
तर्ज – तुम दिल की धड़कन में