विद्या, विनय, विवेक के संगम युवाचार्य महावीर

रचनाएं

साध्वी संगीतश्री

विद्या, विनय, विवेक के संगम युवाचार्य महावीर

तेरापंथ शासन मिल्यो महाश्रमण दरबार
युगा-युगा मिलतो रेवै, अंतर के उद्‌गार।।
युवाचार्य को हमने करीब से देखा तो लगा आप ऐसे हो,
तारों की बारात में हंसते हुए चांद जैसे हो।
शब्दों का जाल नहीं, हमारे दिल की परिभाषा है,
महाश्रमण युग की तकदीर तुम, महावीर-महावीर जैसे हो।
②विद्या, विनय, विवेक के संगम युवाचार्य महावीर,
झेलो हमारा अभिनंदन, धीर-वीर महावीर।
कार्यकुशलता अनुपम देखी, सहज सरलता है बेजोड़,
तुम जैसे युवाचार्य को पाकर, जागी हम सबकी तकदीर।
③योगक्षेम वर्ष का पावन दिन ये आया,
महाश्रमण पट्टधर महावीर सबके मन को भाया।
सौ-सौ बधाई देती तुमको, जागे भाग्य हमारे,
कोड दीवाली रहो युवाचार्य, महाश्रमण सुख साया।