रचनाएं
तेरापंथ री राजधानी, गुरु जन्मभूमि है मनहारी
जंबू द्वीप के भरतक्षेत्र में चंदेरी नगरी प्यारी,
तेरापंथ री राजधानी, गुरु जन्मभूमि है मनहारी।।
१.सभा सुधर्मा में मघवा ज्यूं महाश्रमण गुरुवर सोहे,
योगक्षेम वर्ष री सुष्मा जन-जन रा मनड़ा मोहे,
युवा मनस्वी युवाचार्यवर महावीर है जयकारी।।
२.महासती चंदनबाला ज्यूं विश्रुतविभाजी शासन में,
साध्वीवर्या संबुद्धयशा जी नंबर टू श्रमणीगण में,
जबर झुंड है संत सत्यों रो, समवसरण साताकारी।।
३.तेरामास प्रवास लाडनूं, तेरा मासखमण रा ठाट,
युवाचार्य रे मनोनयन पर, साध्वीप्रमुखा री सौगात
पुलकित प्रमुदित गणपति पल-पल, सींचे शासन फुलवारी।।
४.वर्धापन! अभिनंदन! भगवन! मासखमण रो अभिनंदन,
बड़ो कठिन है तप ओ तपणो, रसनाजय रो अनुमोदन,
लब्धि श्री स्यूं धन्यप्रभा तक गुम्फित माला मोत्यांरी।।
५.निरख निरख नित नया नजारा हिवड़ो ओ हरसावै है,
प्रबल पुण्याई भैक्षवण री, शिखरां सुयश चढ़ावै है,
कीर्तिमान री रची श्रृंखला, योगक्षेम महिमा भारी।।
तर्ज – व्याऊ बिनणी