मंत्र दीक्षा बचपन के संस्कार पचपन तक काम करते हैं

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रोहिणी दिल्ली।

मंत्र दीक्षा बचपन के संस्कार पचपन तक काम करते हैं

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या शासन श्री साध्वी सुमनश्री जी के सान्निध्य में मंत्र दीक्षा कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। तेरापंथ युवक परिषद् के तत्त्वाधान में आयोजित कार्यक्रम का प्रारम्भ 'लक्ष्य है ऊंचा हमारा' गीत का संगान युवक परिषद् ‌के सदस्यों ने किया। शासनश्री साध्वी सुमन श्री जी ने रोहिणी व पालम ज्ञानशाला के बच्चों को विधिवत् मंत्र दीक्षा के संकल्पों से संकल्पित करते हुए कहा कि बच्चे घर परिवार के कुलदीपक है। उनको प्रेम वात्सल्य का सिंचन और सद्‌संस्कारों के बीज चाहिए। बच्चों का जीवम पान के कच्चे पत्तों के समान है। पत्तों को जैसा चाहे मोड़ सकते हैं सूखने के बाद वो टूर जाएंगे। बच्चे भगवान की मूरत है तो बच्चे भगवान की सूरत है। बचपन के दिये संस्कार पचपन यानि जीवन भर काम करेंगे वास्तव में बच्चे असली संपत्ति है तिजोरी में रखी सम्पत्ति काम आये या नहीं भी आये किन्तु यह संपत्ति अवश्य काम आएगी। अतः सभी अभी- भावकों का कर्तव्य है कि ज्ञानशाला में अपने-अपने बच्चों को अवश्य आने की प्रेरणा दें। ज्ञानशाला संस्कार शाला है। यहाँ से मिले हुए धार्मिक संस्कारों से एक होनहार योग्य पीढ़ी का निर्माण होगा। ज्ञानशाला के बच्चों में लघुनाटिका संवाद प्रस्तुत किया जिसको सुनकर सभी भावचिभारे हो गये। मंत्र दीक्षा पुस्तिका और माला तेरापन्थ युवक परिषद द्वारा सभी बच्चों को उपलब्ध कराई गयी। ज्ञानशाला प्रभारी रतनलाल जैन ने अपने सामयिक विचार रखे।