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लिखा जितना जाए कम है - ऐसे हैं हमारे युवाचार्य श्री
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या डॉ. साध्वी श्री परमयशा जी (ठाणा 4) के सानिध्य में समारोह आयोजित किया गया। उनके प्रेरणादायी उद्बोधन ने समस्त उपस्थितजनों के हृदय में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया। डॉ. साध्वी परम यशा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आचार्य प्रवर द्वारा मुख्य मुनि को युवाचार्य के रूप में मनोनित करना एक ऐतिहासिक एवं अद्वितीय घटना है। उन्होंने इस प्रसंग को गौरव, गर्व और आध्यात्मिक उत्कर्ष का प्रतीक बताया। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त किया कि एक साधारण भूमि पर जन्म लेकर, तप, त्याग और साधना से युक्त एक सुकुमार संत का युवाचार्य पद तक पहुँचना तेरापंथ धर्मसंघ की महान परंपरा का जीवंत उदाहरण है।
यह केवल एक पद परिवर्तन नहीं, बल्कि भिक्षुबोधि दिवस के पुनर्जागरण का संदेश है। उन्होंने यह भी प्रेरणा दी कि संसार में अनेक जन्म होते हैं, परंतु कुछ विरले ही ऐसे होते हैं जो समाज और धर्म के लिए कल्पवृक्ष बन जाते हैं। युवाचार्य श्री महावीर कुमार स्वामी का व्यक्तित्व उसी दिव्यता का प्रतीक है, जिनके प्रति जितना लिखा जाए, उतना कम है। यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि तेरापंथ धर्मसंघ की उज्ज्वल परंपरा, अनुशासन एवं आध्यात्मिक नेतृत्व की गौरवगाथा का सजीव चित्रण था। उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के मन में अपार हर्ष, गर्व और प्रेरणा का संचार हुआ। अंत में सभी ने नव-मनोनित युवाचार्य श्री के प्रति अपनी मंगलकामनाएँ अर्पित करते हुए उनके उज्ज्वल, प्रेरणादायी एवं धर्मप्रभावना से परिपूर्ण भविष्य की कामना की।