पूज्य प्रवर ने कहा 'चौथे आरा का साधु है'

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तिरुपुर।

पूज्य प्रवर ने कहा 'चौथे आरा का साधु है'

स्थानीय तेरापंथ भवन, तिरुपुर में परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य, नवमनोनीत युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी के वर्धापना समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन साध्वी सिद्ध प्रभा जी ठाणा 4 के सान्निध्य में किया गया। यह विशेष कार्यक्रम संघ की एकता, अखंडता और अक्षुण्णता की आराधना को समर्पित रहा, जिसमें श्रद्धालुओं ने भारी उत्साह के साथ भाग लिया। समारोह को संबोधित करते हुए साध्वी सिद्धप्रभा जी ने युवाचार्य पद की गरिमा और तेरापंथ धर्मसंघ की अनूठी परंपरा पर प्रकाश डालते हुए अपने मार्मिक विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अन्य स्थानों पर पद और कुर्सी प्राप्त करने की होड़ लगी रहती है, जहाँ अध्यक्ष पद हेतु वोटिंग तक होती है और अजीब दृश्य देखने को मिलते हैं। परंतु तेरापंथ की परंपरा अत्यंत अनोखी है; यहाँ अनेक आचार्यों की परंपरा नहीं है। गुरु-मुख से जो वचन निकल जाता है, वही पूरे संघ के लिए शिरोधार्य होता है।
साध्वी श्री ने मुनि श्री महावीर कुमार जी के दीक्षा काल का स्मरण करते हुए बताया कि आचार्य प्रवर ने दीक्षा के समय ही फरमाया था कि 'वो चौथे आरा का साधु है' और गुरु-दृष्टि से ही व्यक्तित्व में निखार आता है। संघ में दीक्षित होने वाले अत्यंत सौभाग्यशाली होते हैं, क्योंकि तेरापंथ की जन्मघुट्टी एक ऐसा वरदान है, जहाँ कोई भी योग्य बन जाता है। उन्होंने आगे कहा कि संघ में दायित्व सौंपने हेतु हर दृष्टि से परख की जाती है, जिसमें विनय, समर्पण और सहिष्णुता सर्वोपरि हैं। तेरापंथ का ताज वास्तव में कांटों का ताज है। संघ को एक अमूल्य हीरा प्राप्त हुआ है, जो ऊर्जा और शक्ति के निरंतर स्रोत हैं। कार्यक्रम में साध्वी दीक्षाप्रभा जी ने अपने ओजस्वी विचारों की अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ सभा अध्यक्ष रंजित बरड़िया शामिल रहे। कार्यक्रम का सुव्यवस्थित एवं सफल संचालन साध्वी दीक्षाप्रभा जी द्वारा किया गया।