विनम्रता, विनयता का उज्ज्वल प्रतीक युवाचार्य श्री महावीर

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केसिंगा।

विनम्रता, विनयता का उज्ज्वल प्रतीक युवाचार्य श्री महावीर

तेरापंथ भवन में मुनि हिमांशु कुमार जी एवं मुनि हेमंत कुमार जी के पावन सान्निध्य में युवाचार्य वर्धापना दिवस का गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उड़ीसा स्तरीय रूप में आयोजित हुआ। तेरापंथ धर्मसंघ की पहचान उसकी सुदृढ़ एक आचार्यीय व्यवस्था, अनुशासन और गुरु-परंपरा से रही है। धर्मसंघ की स्थापना महामना आचार्य श्री भिक्षु द्वारा की गई और उनके द्वारा आचार्य श्री भारमलजी को युवाचार्य के रूप में चुने जाने से उत्तराधिकार की यह परंपरा आगे बढ़ी। कालांतर में आचार्यों ने अपने योग्य उत्तराधिकारी का चयन युवाचार्य अथवा अन्य उपयुक्त व्यवस्था के माध्यम से किया। वर्तमान में यह गौरवशाली परंपरा युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के शासनकाल में भी निरंतर गतिमान है। तेरापंथ में युवाचार्य का पद आचार्य के बाद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह केवल पद की प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि संघ की भावी व्यवस्था, नेतृत्व और गुरु-परंपरा की निरंतरता से जुड़ा दायित्व है। आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी भी– आचार्य श्री तुलसी जी द्वारा युवाचार्य नियुक्त किए गए थे और आगे चलकर तेरापंथ धर्मसंघ के दसवें आचार्य बने। इसी प्रकार आचार्य श्री महाश्रमण जी को भी आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने अपना उत्तराधिकारी बनाते हुए युवाचार्य नियुक्त किया था। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में आचार्य श्री महाश्रमण जी ने मुख्यमुनि श्री महावीर कुमार जी को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए युवाचार्य पद पर नियुक्त किया। कार्यक्रम में स्थानीय तेरापंथ सभा के अध्यक्ष रामकुमार जैन, तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्ष रश्मि देवी जैन, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष अभिषेक जैन सहित अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने अपने भाव व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा युवाचार्य की नियुक्ति केवल एक व्यक्ति को उत्तरदायित्व सौंपने की यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि तेरापंथ की सुदृढ़ गुरु-परंपरा, अनुशासन और भविष्य की संघ-व्यवस्था के प्रति दूरदर्शी सोच का परिचायक है। कार्यक्रम में मुनि हेमंत कुमार जी ने अपने प्रेरणादायी वक्तव्य से उपस्थित जनसमुदाय को अनुगृहीत किया। उन्होंने युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी के व्यक्तित्व, गुणों, साधना, विनम्रता एवं संघ के प्रति उनकी समर्पित भावना पर प्रकाश डाला। मुनिश्री ने युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी तथा गुरुदेव आचार्य श्री महाश्रमण जी के साथ बिताए अपने अनुभवों को भी साझा किया।