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युवाचार्य प्रवर की गुरुनिष्ठा अद्भुत है
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या शासनश्री साध्वी मानकुमारीजी के पावन सान्निध्य में युवाचार्य मनोनयन वर्धापना समारोह एवं तप अभिनन्दन समारोह का कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर शासनश्री साध्वी मानकुमारीजी ने उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ में आचार्य के कई कई प्रमुख कार्य बताए गए हैं उनमें एक सर्वोपरि कार्य है भावी आचार्य का निर्णय करना, अपने उत्तराधिकारी का चयन करना। अपने उत्तराधिकारी का चयन करने से पूर्व आचार्य पूरे धर्मसंघ षर दृष्टि डालते हैं, जिसे युवाचार्य बनाना होता है उसे खूब जांचते-परखते हैं और फिर जिस पर पूरा भरोसा होता है निश्चिंत होकर उत्तराधिकारी घोषित करते हैं। आचार्य प्रवर ने आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी सम्पन्नता समारोह एवं योगक्षेम वर्ष के पावन अवसर पर जैन विश्व भारती के विशाल प्रांगण सुधर्मा सभा में चतुर्विध धर्मसंघ के बीच मुख्य मुनि महावीर कुमार जी को युवाचार्य पद पर शोभित कर धर्मसंघ को निश्चिंतता, सुदृढता प्रदान की। युवाचार्यश्री की विनम्रता, समर्पण भावना और गुरुनिष्ठा ने आचार्य प्रवर का दिल जीत लिया। छोटे से गांव फलसूंड के बालक महावीर का तेरापंथ धर्मसंघ के नवम् युवाचार्य पद पर मनोनयन होना अपने आप में गर्व की बात है। शासनश्री साध्वी जी ने मंगलकामना व्यक्त करते हुए कहा कि युवाचार्य प्रवर निरामय रहें, स्वस्थ रहें एवं उत्तरोत्तर आध्यात्मिक विकास करते रहें। इस अवसर पर साध्वीवृंद ने सामुहिक गीत, साध्वी कीर्तिरेखाजी ने कविता के द्वारा युवाचार्य प्रवर के प्रति अध्यात्मिक मंगलकामना व्यक्त की, महिला मंडल के द्वारा सामुहिक गीत एवं सभा मंत्री ने वक्तव्य के द्वारा मंगलकामना प्रेषित की। 11 वर्षीय नन्हे बाल तपस्वी जयंत विनायक को 11 दिवसीय तप करने पर आज साध्वीश्री जी दर्शन कराए गए। बाल तपस्वी जयंत विनायक के तप अनुमोदना कार्यक्रम में शासनश्री साध्वी जी ने कहा जयन्त का मनोबल बहुत मजबूत है। इसने जो सोचा वो कर दिखाया।