आचार्य भिक्षु : सत्य, संयम, त्याग और दृढ़ संकल्प की अनुपम मिशाल

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दिल्ली।

आचार्य भिक्षु : सत्य, संयम, त्याग और दृढ़ संकल्प की अनुपम मिशाल

अणुव्रत भवन में आचार्य भिक्षु के 301वें जन्म दिवस के उपलक्ष में भिक्षु जन्मोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समागत जनसमुदाय को संबोधित करते हुए शासनश्री साध्वी सुव्रताजी ने कहा कि हम बहुत सौभाग्यशाली हैं कि हमें आचार्य भिक्षु द्वारा संचालित प्राणवान तेरापंथ धर्मसंघ मिला है। इस संघ में शालीन परंपराएं, सुदृढ़ मर्यादाएं एवं सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं विद्यमान हैं। उन्होंने कहा कि आचार्य भिक्षु सत्य के पक्षधर और दृढ़ संकल्प के धनी थे। विरोध की आंधी और तूफानों के बीच भी वे दृढ़ता से खड़े रहने वाले महापुरुष थे। वे जन्म से ही अनेक विशेषताओं को अपने साथ लेकर आए थे। उनके जन्म के समय शुभ शकुन हुए। उनके बाएं पैर में ऊर्ध्वरेखा, दाएं हाथ में मत्स्य रेखा एवं मणिबंध रेखाएं थीं। ललाट पर तीन आड़ी रेखाएं, नाभि पर स्वस्तिक रेखा तथा वक्षस्थल पर छत्राकृति का चिह्न था। उन्होंने कहा कि आचार्य भिक्षु का जीवन ज्योतिर्मय था। शुद्धाचार के पालन के लिए उन्होंने गुरु का साया छोड़ा। आहार, पानी, स्थान और पथ की अनेक समस्याओं को उन्होंने हंसते-हंसते सहन किया। अपने सिद्धांतों को लोगों को समझाने के लिए उन्होंने पूरी-पूरी रात भ्रमण किया। उनका जीवन सत्य, संयम, त्याग और दृढ़ संकल्प का प्रेरणास्रोत रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ ‘सुगुरु को वंदन वारंबार’ आचार्य प्रवर द्वारा रचित गीत के संगान के साथ हुआ। शासनश्री साध्वी सुमनप्रभाजी एवं साध्वी चिन्तनप्रभाजी ने आचार्य भिक्षु के सिद्धांतों का प्रतिपादन करते हुए उनके जीवन से जुड़ी प्रेरक घटनाओं का वर्णन किया और श्रद्धासुमन अर्पित किए। साध्वी कार्तिकप्रभाजी ने सुमधुर स्वर में संगान प्रस्तुत करते हुए आचार्य भिक्षु के चरणों में श्रद्धासिक्त अभिवंदना अर्पित की। कार्यक्रम में विकास परिषद के संयोजक मांगीलाल सेठिया, दिल्ली सभा अध्यक्ष विमल बैंगाणी, मध्य दिल्ली तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा कनक चोपड़ा तथा मांगीलाल भडला सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।