भीतर सुप्त पड़े पौरुष, संस्कार और चेतना को जागृत करने वाला पर्व : चातुर्मास

संस्थाएं

सिकंदराबाद।

भीतर सुप्त पड़े पौरुष, संस्कार और चेतना को जागृत करने वाला पर्व : चातुर्मास

आस्था, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अभूतपूर्व संगम उस समय देखने को मिला, जब युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि दीप कुमारजी एवं सहवर्ती मुनि काव्य कुमारजी के चातुर्मासिक मंगल प्रवेश के अवसर पर सिकंदराबाद में भव्य 'योगक्षेम रैली' निकाली गई। सभा को संबोधित करते हुए मुनि दीप कुमारजी ने कहा— 'चातुर्मास केवल चार महीनों का ठहराव नहीं, बल्कि हमारे भीतर सुप्त पड़े पौरुष, संस्कार और चेतना को जागृत करने वाला महाविस्फोट है। आज का मनुष्य धन, सुविधा और प्रतिष्ठा की अंधी दौड़ में स्वयं को भूलता जा रहा है। ऐसे समय में चातुर्मास आत्मचिंतन, आत्मसंयम और आत्मपरिवर्तन का दिव्य अवसर लेकर आता है।' उन्होंने आगे कहा कि चातुर्मास धर्मध्यान, स्वाध्याय, त्याग, तप, संयम और ज्ञानार्जन का स्वर्णिम काल है। प्रत्येक व्यक्ति को नियमित प्रवचन श्रवण, साधना, तपस्या एवं आत्मविकास का संकल्प लेकर इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ में प्रत्येक कार्य गुरु आज्ञा से ही सम्पन्न होता है। हम भी परम पूज्य युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की आज्ञा से चातुर्मास हेतु यहाँ पधारे हैं। गुरुदेव की प्रेरणा से मनाया जा रहा 'योगक्षेम वर्ष' सम्पूर्ण धर्मसंघ के आध्यात्मिक उत्थान का प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा। अपने उद्बोधन में मुनि काव्य कुमारजी ने कहा कि चातुर्मास आत्मशुद्धि, संस्कार संवर्धन और जीवन-परिवर्तन का पर्व है। यदि प्रत्येक व्यक्ति इन चार महीनों में अपने जीवन में एक श्रेष्ठ परिवर्तन का संकल्प ले ले, तो उसका जीवन भी बदल सकता है और समाज भी।
स्वागत उद्बोधन तेरापंथी सभा,अध्यक्ष सुशील संचेती ने दिया। तेयुप अध्यक्ष विनोद दूगड़, तेमम अध्यक्ष नमिता सिंघी, TPF अध्यक्ष वीरेंद्र घोषल सहित अनेक गणमान्यजनों ने अपने प्रेरक विचार एवं भावपूर्ण गीतों की प्रस्तुतियाँ दीं। चेन्नई से पधारे पल्लावरम के सभा अध्यक्ष दिलीप भंसाली अपने भावपूर्ण विचार प्रकट किए। कार्यक्रम का प्रभावशाली एवं गरिमामय संचालन लक्ष्मीपति बैद ने किया।