संस्थाएं
सम्यक्त्व एवं तप साधना का प्रेरक संदेश
सेलम। साध्वी श्री मार्दव श्री जी ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में शुक्ल पक्ष, कृष्ण पक्ष तथा विभिन्न तिथियों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का विवेचन करते हुए बताया कि जन्म के साथ जुड़े अनेक बाह्य प्रभावों के बीच भी मनुष्य अपने आंतरिक भावों को शुद्ध बनाकर आत्मोन्नति के पथ पर अग्रसर हो सकता है। अपने प्रेरणादायी प्रवचन में साध्वी संयमलता जी ने सम्यक्त्व को जीवन की वास्तविक दिशा एवं आत्मकल्याण का आधार बताया। आपने कहा कि सम्यक्त्व का उदय व्यक्ति के विचारों, व्यवहार और भावों में पवित्रता लाता है। भावशुद्धि, हृदय-परिवर्तन एवं सम्यक् दृष्टि के माध्यम से जीवन में संतुलन, शांति और प्रकाश का संचार होता है। तप तभी सार्थक बनता है जब उसके साथ सम्यक्त्व और अंतर्मन की निर्मलता जुड़ जाए। आपने सभी को अपने जीवन में सम्यक्त्व को विकसित कर आत्मविकास की दिशा में सतत प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी। प्रवचन के उपरांत साध्वी श्री द्वारा मंगलमय तप-अनुमोदना गीत का संगान किया गया।