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भक्तामर स्तोत्र आधि-व्याधि से मुक्त कर समाधि देने वाला है
महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी कुंदनप्रभा जी के पावन सानिध्य में तेरापंथ युवक परिषद व तेरापंथ किशोर मंडल जसोल के तत्वावधान में भक्तामर स्त्रोत्र का अनुष्ठान रखा गया। साध्वी विद्युतप्रभा जी ने कहा भक्तामर स्त्रोत्र एक ऐसा स्त्रोत्र है जो विश्व के सभी जैनियों कंठाभरण बना है, उन्होंने भक्तामर के उद्ग्रस्त का परिचय बहुत ही रोमांचकारी व ह्रदयग्राही रूप से बताया। इससे पूर्व साध्वी कुंदनप्रभा जी ने कहा- भारतीय परंपरा में अपने ईष्ट की पूजा आराधना, उपासना की परिपाटी रही है। कंही स्तुति के रूप में, कंही जाप के रूप में, कंही स्त्रोत्र के रूप में की है। भक्तामर स्रोत्र एक ऐसा स्त्रोत्र है जो आधिव्याधि और उपाधि से निजात डिलाकर समाधि को देने वाला है।उन्होंने सहज, सरल व रोचक उदाहरणों से सबको रोमांचित कर दिया। साध्वी किरणयशा जी व साध्वी चारित्रप्रभा जी द्वारा दसों - दिशाओं का कवज बनाकर मंत्र, ऋद्धि मंत्र सहित भक्तामर का संगान कराया गया। तेयुप जसोल अध्यक्ष भरत बोकड़िया, मंत्री तरुण भंसाली व कोषाध्यक्ष मनीष संकलेचा का विशेष सहयोग मिला।