अहिंसक और नैतिक मूल्यों से ही आजादी अर्थपूर्ण बनती है

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चेन्नई।

अहिंसक और नैतिक मूल्यों से ही आजादी अर्थपूर्ण बनती है

अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वावधान में अणुव्रत समिति, चेन्नई द्वारा स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में ‘अणुव्रत एवं राष्ट्र निर्माण’ विषय पर स्वर्णिम भारत काव्योत्सव का आयोजन ट्रिप्लिकेन स्थित तेरापंथ भवन में हुआ। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, ट्रिप्लिकेन की सहभागिता में यह काव्योत्सव हुआ। सान्निध्य प्रदाता अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि डॉ. पुलकितकुमार ने अणुव्रत आंदोलन के प्रवर्तक आचार्य तुलसी के कथन ‘असली आजादी पाओ’ के संदर्भ से कहा कि अहिंसक और नैतिक मूल्यों की प्रतिष्ठा से आजादी अर्थपूर्ण बन जाती है। अणुव्रत स्वतंत्रता से स्वच्छंद घुमना नहीं, अपितु संयम से जीवन जीना सिखाता हैं। अणुव्रत को अपनाकर हम स्वर्णिम भारत को आगे बढ़ाने में सहभागी बन सकते हैं। कवि नचिकेता मुनि आदित्यकुमार ने अपनी काव्य प्रस्तुति के साथ कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में कवि और कविता का क्रांतिकारी योगदान रहा था। समिति अध्यक्षा सुभद्रा लुणावत ने स्वागत भाषण में जीवन में अणुव्रतों के पालन करने और करवाने की प्रेरणा दी। उपाध्यक्ष डॉ. दिलीप धींग ने काव्यात्मक संयोजन करते हुए कहा, ‘वतन के चमन में अमन के सुमन खिलाओ।’ मार्गदर्शक गौतमचंद सेठिया ने कहा कि वे चेन्नई में पले-बढ़े, किंतु आचार्य महाप्रज्ञ का हिंदी साहित्य पढ़ने से उनकी हिंदी इतनी अच्छी हो गई कि उत्तर भारतीय हिंदी भाषी भी चकित हो जाते हैं। मंत्री कुशल बांठिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष स्वरूपचन्द दाँती, सहमंत्री प्रदीप चोरड़िया, अणुव्रत-सेवी संपतराज चोरड़िया आदि उपस्थित थे।