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अनुशासित स्वतंत्रता ही सच्ची स्वतंत्रता है
डी.वी. कॉलोनी स्थित तेरापंथ भवन में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि दीप कुमारजी ठाणा-2 के सान्निध्य में '80वें स्वतंत्रता दिवस' का आयोजन जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा सिकंदराबाद द्वारा किया गया। मुनि दीप कुमारजी ने कहा— हर मनुष्य स्वतंत्रता चाहता है। आज के युग में उसकी मांग और अधिक बढ़ गई है, किंतु स्वतंत्रता की सच्ची कुंजी संयम के द्वारा प्राप्त होती है। उसके बिना वह वरदान नहीं, अभिशाप साबित होता है। स्वतंत्रता का अर्थ अनुशासनहीनता समझना भूल है। जिस समाज और राष्ट्र के सदस्य मर्यादित और अनुशासित होते हैं, स्वतंत्रता की लक्ष्मी का वहाँ स्थायी निवास होता है। जहाँ कर्तव्यविमुखता और मर्यादाहीनता बढ़ती है, वहाँ सारी व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो जाती है और आगे जाकर परतंत्रता का प्रभाव बढ़ता है।अनुशासनयुक्त स्वतंत्रता हो। मुनिश्री ने आगे कहा— सामाजिक जीवन में संयम, विशेषकर बहुत जरूरी है। ज्यों-ज्यों संयम और अनुशासन की प्रतिष्ठा होगी, मानव के चरण स्वतंत्रता की सही दिशा की ओर बढ़ेंगे। स्वतंत्रता का वह रूप एक व्यक्ति के लिए ही नहीं, सारे विश्व के लिए कल्याणकारी सिद्ध होगा। मुनिश्री काव्य कुमारजी ने कहा आज का यह दिन केवल ध्वज लहर का, राष्ट्रगान गाने का, सिर्फ यह बात याद करने का की 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ था अपितु उन बलिदानी वीरों को याद करने का दिन है ।