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जनता की अदालत एवं शिखर संगम में संवाद
‘जनता की अदालत एवं शिखर संगम’ ने संवाद, साहस, नेतृत्व और नेटवर्किंग का एक यादगार मंच प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आयोजन की सकारात्मक ऊर्जा ने सभी को प्रभावित किया। कार्यक्रम के पहले चरण ‘जनता की अदालत’ में सवालों को बेबाकी से रखने और स्पष्ट उत्तर देने का अवसर मिला। के.एल. जैन समूह के के.एल. जैन के सहयोग एवं उनके सहज, स्पष्ट और निडर जवाबों ने इस सत्र को विशेष बनाया। कार्यक्रम के न्यायाधीश आलोक कुमार, वीएचपी के इंटरनेशनल प्रेसिडेंट एवं वरिष्ठ अधिवक्ता, ने अपनी कानूनी विशेषज्ञता और प्रभावशाली संचालन से जनता की अदालत को प्रभावी स्वरूप दिया। अधिवक्ता मनीषा अग्रवाल नारायण, स्थायी अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय, की गरिमामयी उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। वहीं संजीव चिंडालिया ने जनता की अदालत के कॉन्सेप्ट एवं सेटअप को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का दूसरा प्रमुख आकर्षण ‘शिखर संगम’ रहा, जिसमें संवाद, नेटवर्किंग और आपसी जुड़ाव को केंद्र में रखा गया। स्वाति एवं प्रीति द्वारा आयोजित खेल एवं नेटवर्किंग सत्र ने प्रतिभागियों में उत्साह और सहभागिता बढ़ाई। इस दौरान यह संदेश भी उभरा कि नेटवर्किंग केवल परिचय या संपर्क साझा करने तक सीमित नहीं, बल्कि विचारों के आदान-प्रदान, रिश्तों के निर्माण और नई संभावनाओं के सृजन का माध्यम है। टीपीएफ नेतृत्व टीम की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को मजबूती प्रदान की। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विजय नाहटा, टीपीएफ गौरव संपत नाहटा, एन.जेड. अध्यक्ष राजेश, राष्ट्रीय संयोजक प्रशांत सुराणा सहित विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही। संयोजक विकास मालू आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा। राज सिंघवी के सहयोग एवं प्रोत्साहन के लिए भी आभार व्यक्त किया गया।