युवक भौतिकता के साथ अध्यात्म के संस्कारों से संपन्न हो

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बीदासर।

युवक भौतिकता के साथ अध्यात्म के संस्कारों से संपन्न हो

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण की सुशिष्या साध्वी मंजूयशा जी के पावन सान्निध्य में बीदासर तेरापंथ युवक परिषद के नव निर्वाचित अध्यक्ष चिराग बैंगानी और उनकी पूरी नवीन टीम ने अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के द्वारा निर्धारित नियमों को बड़े उत्साह पूर्वक स्वीकार किया। शपथ ग्रहण कराने वाले अभातेयुप के सदस्य पारस बैद एवं तेयुप के संरक्षक नवदीप बैंगानी ने पूरी टीम को शपथ ग्रहण करवाई।
साध्वीश्री जी ने पूरी युवा टीम को उद्‌बोधन प्रदान करते हुए कहा- जीवन की तीन अवस्थाएं है बाल्यावस्था, युवावस्था एवं वृद्धावस्था । इन तीनों में युवावस्था सबसे शक्तिशाली होती है। यही युवा अवस्था में ही व्यक्ति नए नए सृजन का कार्य कर सकता है। उन्होंने आगे कहा- हर युवक भौतिकता के साथ अध्यात्म के संस्कारों से संपन्न हो । धार्मिकता एवं सदसरकारो के बिना हमारा जीवन अधुरा रह जाता है। वर्तमान की युवापीढ़ी जो दिशा हीन बन रही है, व्यसनों को प्रभाव उनपर ज्यादा पड़ रहा है बीड़ी सिगरेट शराब, ड्रग्स आदि नशीले पदार्थों का जो प्रयोग हो रहा है। इन सबसे सभी युवक मुक्त रहने का संकल्प निभाएं। पूरी युवा टीम पूर्ण व्यसन मुक्त बने और अपनी उर्जा व शक्ति को सद्‌कार्यों में लगाएं। सबके प्रति अध्यात्म विकास की मंगल कामना।
सेवा, संस्कार और संगठन के आयामों को सदा बढ़ाते रहे। इस अवसर पर तेयुप के पूर्व मंत्री रितिक बौथरा ने 2 वर्षीय कार्यकाल में संपादित कार्यों का बड़े व्यवस्थित रूप से प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर शासनश्री साध्वी रमावती, साध्वी नय श्रीजी एवं साध्वी चिन्मयप्रभा ने युवा शक्ति का महत्व बताते हुए पूरी टीम के प्रति आध्यात्मिक मंगल कामना दी। कार्यकम का संयोजन रितिक बोथरा ने बड़ी कुशलता पूर्वक किया। मंत्र दीक्षा का कार्यक्रम तेयुप द्वारा -मंत्र दीक्षा समारोह कार्यक्रम का प्रारंभ साध्वी इंदुप्रभा साध्वी तीर्थप्रभा एवं साध्वी मानसप्रभा के नमस्कार महामंत्र के मंगल गीत से हुआ।
साध्वी श्री जी ने मंत्र दीक्षा का महत्व बताते हुए कहा- सभी धर्मो में अलग· अलग मंत्र होते हैं जैन धर्म का मंत्र है नमस्कार महामंत्र। इसका जप हर जवान,वृद्ध एवं बच्चों को करना चाहिए। इससे हमारे भीतर में शान्ति, समाधि व पवित्र भावों का संचार होता है। करीब 31 बच्चे इसमें संभागी रहे जो प्रति रविवार ज्ञानशाला में प्रशिक्षिकाओं द्वारा अच्छे संस्कार एवं जैन दर्शन तत्व दर्शन, व्यवहारिक ज्ञान का भी प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने भावी जीवन का निर्माण कर रहे है। मुख्य प्रशिक्षिका भावना दुगड़ ने अपनी भावना अभिव्यक्त की। कार्यक्रम का संयोजन साध्वी चिन्मयप्रभा जी ने किया।