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जीवन को आनंदमय बनाने के लिए प्रेक्षाध्यान जरूरी
आचार्य श्री भिक्षु समाधि स्थल संस्थान सिरियारी के प्रेक्षाहॉल में अष्टदिवसीय प्रेक्षाध्यान शिविर का समापन समारोह आयोजित किया गया। प्रेक्षागीत के संगान के पश्चात् मुनि चैतन्य कुमार 'अमन' ने शिविरार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा- चैतन्य जागरणा जितेन्द्रिय बनने से ही संभव है। इन्द्रिय विजय से ही साधना सिद्धत्व को प्राप्त हो सकती है। हर व्यक्ति अपनी सक्षमता और योग्यता का विकास करे। ध्यान साधना व्यक्ति को सक्षमता प्रदान करती है। व्यक्ति जल (पानी) की तरह निर्मल, गतिशील और उपयोगिता सिद्ध करे। मुनि अमन ने कहा- साधना के लिए साधन की अपेक्षा रहती है। शुद्ध साधन से ही शुद्ध साधना है। अतः निरन्तर अभ्यास करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास करे। और अपनी लक्ष्य भी आगे बढ़ते रहेंगें। तमी कामयाबी हो सकेगी। इस अवसर पर मुनि जितेन्द्रकुमारजी ने विशेष रूप में अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा आपने जिन सुखद पलों को जीया है। मुनि जितेन्द्र ने बताया- आप ध्यान के केवल प्रयोग दीर्घश्वास प्रेक्षा अथवा अनुप्रेक्षा के प्रयोगों को निरन्तर करेंगे तो निश्चय ही आपका निरन्तर प्रयास सार्थकता को लिए होगा। कार्यक्रम में प्रेक्षासाधिका साश्री बैद चन्द्रा जैन, स्वाति बड़ौला, निर्मल दूगड़, चेतन दूगड़, सुमित मणोत, तुलसी जैन ने अपने अनुभवों को शेयर किया। कार्यक्रम का संचालन प्रेक्षासाधक विनोद जैन तथा आभार उषा धाड़ेवा ने व्यक्त किया। संस्थान की ओर से व्यवस्थापक महावीर सिंह, बी.के. कल्याण सिंह, श्याम सुन्दर का विशेष सहयोग रहा।