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दीक्षार्थी मंगलभावना समारोह
आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी, शिष्या डॉ. साध्वी परमयशाजी के सान्निध्य में 'दीक्षार्थी मंगलभावना समारोह' के कार्यक्रम का समायोजन (आयोजन) हुआ। डॉ. साध्वी परमयशाजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि दीक्षा वीतरागता की मंजिल है, शाश्वत सत्य का सौरभ है और शिवत्व की सर्वोत्तम संपदा है। अनुत्तर धर्म की आराधना है। आप All Rounder बनना। 'जत्ता मे जवणिज्जं च मे' का रहस्य सूत्र हमेशा साथ रहे। हर मोड़ जागरूकता से शुरू हो। हर शाम उपलब्धियमय हो। हर पल रचनात्मक आत्मक (आलोक) लिए आए हो। अद्भुत है इष्ट आराध्य दीक्षार्थी बहनों के, जो आश्वास और विश्वास दीप हैं। इनकी जन्मकुंडली के शानदार हैं नक्षत्र, जो उच्च ग्रहों का योग बनाते हैं। दोनों दीक्षार्थी बहनें श्रद्धा सितार बजाते रहें, शासन की शान बढ़ाते रहें। कार्यक्रम की शुरुआत महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण से हुई। तेरापंथ सभा परामर्शक बसंतीलाल नाहर, तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा महिमा चौड़िया, तेरापंथ युवक परिषद् मनीष कावाड़िया, ज्ञानशाला की मुख्य प्रशिक्षिका उषा डांगी, उपासक अर्जुन मेड़तवाल इन सभी ने दीक्षार्थी बहनों के प्रति अपनी मंगलभावनाएं प्रेषित कीं। दीक्षार्थी बहनों के पारिवारिकजनों में अंजू बैद, ललिता सेठिया आदि सभी ने अपनी भावों (भावों) की प्रस्तुति दी। साध्वी विनम्रयशा जी ने भी कविता के माध्यम से दीक्षार्थी बहनों के प्रति अपने भावों की प्रस्तुति दी। कन्या मंडल की संयोजिका सिमरन पोखराना ने मुमुक्षु सुमन और भावना नाहटा का परिचय दिया। मुमुक्षु सुमन ने कहा कि मेरे संस्कारों की नींव लगाने वाले मेरे माता-पिता के प्रति अब मैं अनंत कृतज्ञता ज्ञापित करती हूँ। मैं गुरु के प्रति अनंत कृतज्ञता ज्ञापित करती हूँ, जो मुझे भवसागर से तार रहे हैं। ये मेरे पूर्व जन्म के संस्कार जो मैं इस पथ पर अग्रसर हो रही हूँ। अनुव्रत समिति ग्रेटर सूरत (Greater Surat) के अध्यक्ष रतनलाल भलावत ने बहुत ही सुंदर भावों की प्रस्तुति दी। मुमुक्षु भावना नाहटा ने कहा कि मुझे सब कुछ बनना limited से unlimited बनना है। गुरुदेव के प्रति अनन्त-अनन्त कृतज्ञता और माता-पिता के प्रति भी अनन्त-अनन्त कृतज्ञता। निर्मल चपलोत ने दीक्षार्थी अभिनंदन पत्र का वाचन किया। कार्यक्रम का संयोजन तेरापंथ सभा मंत्री पुखराज हिरण ने किया।