परस्पर मेल है तो जीवन एक खेल है, दिल में भेद है तो जीवन जेल है

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उत्तर हावड़ा।

परस्पर मेल है तो जीवन एक खेल है, दिल में भेद है तो जीवन जेल है

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में रविवारिय मुख्य प्रवचन कार्यक्रम 'घर को कैसे बनाएं हैप्पी होम' विषय पर उत्तर हावड़ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा योगक्षेम विहार के योगक्षेम सभागार में आयोजित हुआ। इस अवसर पर अच्छी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा — घर का प्रत्येक सदस्य घर को खुशहाल रखना चाहता है। घर को खुशहाल रखने के अनेक सूत्र हैं। उनमें एक सूत्र है - सामंजस्य। परस्पर मेल है तो जीवन एक खेल है, अगर दिल में भेद है तो जीवन जेल है। जीवन एक पुष्प है तो सामंजस्य सुवास है। सामंजस्य के बिना घर समृद्ध नहीं हो सकता। जहां खींचतान है, कलह है वहां असमाधि है। एक दूसरे के विचारों को समझने की कोशिश करनी चाहिए। सामुदायिक जीवन में कभी मनमुटाव हो सकता है, मतभेद हो सकते हैं लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए। सहिष्णुता, स्नेह, विनय, वात्सल्य, संतुलन, संयम, सकारात्मक भाव व नेतृत्व के प्रति आस्था रखने से घर में खुशहाली हो सकती है।
व्यक्ति जितना सदाचारी होगा उतना ही उसका मूल्य बढ़ जायेगा। चरणों की नहीं आचरण की पूजा होनी चाहिए। और चरित्र की भी पूजा होनी चाहिए। इस अवसर पर मुनि परमानंदजी ने कहा — मकान बनाया जाता है, घर बसाया जाता है। परिवार के सदस्य में स्नेह, सौहार्द होता है तो घर हैप्पी होम बन जाता है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि कुणाल कुमार जी के मंगलाचरण से हुआ। इस अवसर पर इचलकरंजी से समागत जवाहर लाल भंसाली ने अपने विचार व्यक्त किये। आभार ज्ञापन उत्तर हावड़ा सभा के मंत्री विनीत कोठारी ने किया।