रचनाएं
श्रमणत्व के विलक्षण कीर्तिधर - आचार्य श्री महाश्रमण
महापुरुषों का जन्म हमेशा इतिहास का दुर्लभतम दस्तावेज माना जाता है। ऐसे तो संसार में न जाने कितने लोग जन्म लेते हैं, मगर कुछ जन्म ऐसे होते हैं जो अपनी सृजनधर्मिता और महान कर्मों से इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों की धरोहर बन जाते हैं। लगन, लक्ष्य, परिश्रम और आत्मविश्वास उनके कदमों का राज बता देता है। उनके चिंतन की गहराई से निकलती आवाज स्वतः प्रेरणा बन जाती है और आत्म आरोहण की ऊंचाई, वैराग्य की खाद पाकर निर्णायक शक्ति में जान भर देती है। हौसलों की बुलंदियों पर उठनेवाला हर कदम साहस का सेतु होता है।
नये अध्याय का शुभारंभ :
पुरुषार्थ की तूलिका से जीवन के पृष्ठों में रंग भरा, प्रज्ञा और पुरुषार्थ से नई मंजिलें तय करने में सफल रहे। आपके जीवन का हर पल सृजनात्मक शक्ति का प्रतीक है। आपने विषम परिस्थितियों में भी शिखर तक आरोहण कर लिया। आपके जीवन के ऊंचे और सहज आदर्श कथनी-करनी की समानता दर्शाते हैं।
उल्लेखनीय सच्चाई :
आचार्य श्री महाश्रमणजी की साधना, तपस्या, क्षमता, योग्यता, विनम्रता हर दिल को अपनी ओर खींच रही है। आचार्यश्री महाश्रमण समयज्ञ हैं, आगमज्ञ हैं, प्राप्त विद्याओं के मर्मज्ञ हैं। आपका विनय-समर्पण कलियुग में सतयुग का दर्शन करवाता है। आपके पास आनेवाला प्रत्येक व्यक्ति दर्शन कर एक बार में ही आपका हो जाता है। यह है आपकी अद्वितीय साधना और तपस्या की पुण्यों की कमाई है।
नव वैभव देता है योगक्षेम वर्ष :
योगक्षेम वर्ष का अर्थ है—अप्राप्त को प्राप्त करना और प्राप्त की सुरक्षा करना। योगक्षेम वर्ष हमारे धर्मसंघ का अनुभव सिद्ध नव वैभव है। तेरापंथ संघ की राजधानी लाडनूं में परम पूज्य गुरुदेव तथा युवाचार्य प्रवर के सानिध्य में ज्ञान, दर्शन, चारित्र तथा तप गंगा में जो अध्यात्म चेतना का जागरण हुआ, यह विश्व रिकॉर्ड में तथा इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में अंकित हो गया।
तपस्या के साथ-साथ जो मासखमण करने वाले साधु-साध्वियों ने कीर्तिमान बनाए, यह इस महाश्रमण युग की तप क्रांति का उपहार या दस्तावेज है। मासखमण करने वाले तपस्वी धन्य-धन्य हो गए। लगभग 500 साधु-साध्वियों के बीच यह तप सिद्धि अपने आप में तेरापंथ धर्मसंघ के उज्ज्वल भविष्य के साथ बहुत बड़ी उपलब्धि है।
आगम, स्वाध्याय तथा तत्त्वज्ञान :
आचार्यश्री महाश्रमण जी के नेतृत्व की पहचान है। पधारे हुए सभी साधु-साध्वियों को तत्त्वपरक क्लासेस देकर गण का अक्षुण्ण भंडार भरा है।
योगक्षेम वर्ष अपने आप में अलौकिक क्षमता का चमत्कार है। योगक्षेम वर्ष के चलते-चलते युवाचार्य प्रवर का मनोनयन व नयनाभिराम दृश्य देखने वाले लाखों-लाखों जन अपने आप में धन्यता का अनुभव करते हुए युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के प्रति अनन्त-अनन्त कृतज्ञता के साथ श्रद्धासिक्त भावों के स्वस्तिक उकेरने लगे। नव-संवत् का यह 'माधव शासन' जहाँ महाविदेह सी भव्य रचना तीर्थंकर सा, समवसरण का भव्य नजारा देखने को मिल रहा है।