पालनहार जीवन के सबसे बड़े आधार

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सिकंदराबाद।

पालनहार जीवन के सबसे बड़े आधार

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि दीप कुमारजी के सान्निध्य में 'पालनहार' विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुनि दीप कुमारजी ने कहा— 'पालनहार—जीवन के सबसे बड़े आधार होते हैं।' माँ-पिता का रिश्ता दुनिया का सबसे बड़ा रिश्ता होता है। क्योंकि वह रिश्ता जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है।' माता-पिता का प्रेम ऐसा होता है, जिसमें अपेक्षा कम और समर्पण अधिक होता है। वे अपने बच्चों के सुख में अपना सुख और बच्चों की सफलता में अपनी सफलता देखते हैं।उन्होंने कहा कि वे लोग किस्मत वाले होते हैं जिनके सिर पर माँ-बाप का साया होता है। जीवन में अनेक रिश्ते समय के साथ बनते और बदलते हैं, लेकिन माता-पिता का रिश्ता जीवन के आरंभ से ही व्यक्ति के साथ जुड़ा होता है। इसलिए इस रिश्ते की महत्ता को समझना और माता-पिता के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का भाव रखना आवश्यक है।मुनि श्री ने सुंदर उदाहरण देते हुए कहा— 'याद रखें माता-पिता वे पेड़ की तरह होते हैं जो फल भले न दे, पर छाया जरूर देते हैं।' जिस प्रकार पेड़ स्वयं धूप सहकर दूसरों को छाया देता है, उसी प्रकार माता-पिता अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों को सहन करके बच्चों के जीवन को सुख, सुरक्षा और सुविधा देने का प्रयास करते हैं।उन्होंने कहा कि संसार में पृथ्वी बहुत विशाल है, आकाश बहुत विशाल है और ब्रह्मांड अनंत होता है, लेकिन माँ-पिता की विशालता इससे भी अधिक है। माता-पिता के त्याग, प्रेम और वात्सल्य को किसी सीमा या माप में नहीं बांधा जा सकता। उनका जीवन अपने बच्चों के भविष्य को संवारने में निरंतर समर्पित रहता है। मुनि श्री ने माँ शब्द की महत्ता बताते हुए कहा— 'माँ विश्व भर की लाखों शब्द संपदा वाले शब्द भंडार का सबसे छोटा किंतु अपने आप में परिपूर्ण वात्सल्य भावना से सिक्त और रहस्य गर्भित शब्द है।' माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि प्रेम, ममता, करुणा, त्याग, वात्सल्य और सुरक्षा की संपूर्ण अनुभूति है। बच्चे के जीवन में माँ की भूमिका उसके भावनात्मक और संस्कारात्मक विकास की पहली पाठशाला के रूप में होती है।मुनि श्री ने वर्तमान परिवेश पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा— 'वर्तमान परिवेश में माता-पिता अपने मूल स्वरूप को भूलते जा रहे हैं। बच्चों को समय, संस्कार, संरक्षण नहीं दे पा रहे हैं। बहुत बड़ी विडंबना दिखाई दे रही है।'इस अवसर पर मुनि काव्य कुमारजी ने भी माता-पिता के रिश्ते की विशेषता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने माता-पिता पर विश्वास रखने की प्रेरणा देते हुए कहा— 'अपने माँ-बाप पर इतना विश्वास करो, जितना दवाइयों पर करते हो। वह भले ही कड़वी होगी, पर फायदेमंद होती है।'