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युवा राष्ट्र की अमर संपदा और क्रांति के संवाहक हैं
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में युवा योगक्षेम शिविर का आयोजन तेरापंथ युवक परिषद् उत्तर हावड़ा द्वारा योगक्षेम विहार के योगक्षेम सभागार में आयोजित हुआ। शिविर में तेरापंथ युवक परिषद् उत्तर हावड़ा, दक्षिण हावड़ा, पूर्वांचल, साऊथ कोलकाता, कोलकत्ता मेन, उत्तर कोलकत्ता,टॉलीगंज, बेहाला, लिलुआ, हिन्दमोटर से लगभग 80 शिविरार्थियों ने हिस्सा लिया। शिविर में जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के प्रधान न्यासी सुरेश गोयल, मुख्य वक्ता के रूप में 'दि देव प्लास्टिक इंडस्ट्रीज' के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर नरेन्द्र सुराणा, महानगर मीडिया के संपादक प्रकाश चिंडालिया, प्रेक्षा इंटरनेशनल के फाउंडर मैनेजिंग ट्रस्टी रंजीत दुगड़ थे। शिविर के प्रथम सत्र में "कैसे हो युवाओं का योगक्षेम" विषय पर संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा — युवा धर्मसंघ व देश की विशिष्ट शक्ति है। जिस समाज व देश का युवा जागृत होता है वह देश व समाज बहुत आगे बढ़ता है, विकास करता है। जिसमें धन का मोह नहीं होता और जिजीविषा का मोह नहीं होता वह होता है युवक। युवक वह होता है जो मौत को हथेली में लेकर चलता है। युवक शक्ति का और शक्ति की अभिव्यक्ति का स्रोत होता है। आज युवा योगक्षेम शिविर में युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। योगक्षेम का अर्थ अप्राप्त की प्राप्ति और प्राप्त का संरक्षण है। अर्थात विरासत और विकास दोनों को साथ लेकर चलना है। हमारी विरासत हमारे समृद्ध संस्कार हैं जो हमें पीढ़ियों से मिलते आए हैं उनका संरक्षण करना हमारा परम दायित्व है। दूसरा है विकास। विकास आध्यात्मिक होना चाहिए न कि भौतिक। इस अवसर पर मुख्य अतिथि महासभा के प्रधान न्यासी सुरेश गोयल ने कहा — मूल्यों का संरक्षण करें और रोज कुछ नया सीखें। मुख्य वक्ता उद्योगपति नरेन्द्र सुराणा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा — जीवन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है इसलिए अपने आप पर व चरित्र निर्माण पर अधिक ध्यान दें। सत्र के मुख्य वक्ता प्रेक्षा साधक रंजीत दुगड़ ने कुछ ध्यान के प्रयोगों के साथ युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया। कार्यक्रम के अंत में शिविर के संयोजक दिनेश लुनिया ने आभार व्यक्त किया।