तप कर्मों की निर्जरा का प्रभावी माध्यम है

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विले पार्ले।

तप कर्मों की निर्जरा का प्रभावी माध्यम है

साध्वी राकेश कुमारी जी आदि ठाणा-4 के सान्निध्य में पचरंगी तप की अनुमोदना का कार्यक्रम श्रद्धा एवं उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नवकार मंत्र से हुई। तत्पश्चात साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने उत्तराध्ययन सूत्र पर प्रेरणादायी प्रवचन प्रदान किया।इसके बाद अनुमोदना कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। विले पार्ले महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। साध्वी विपुलयशा जी ने सभी तपस्वियों की अनुमोदना करते हुए गुरुदेव के आशीर्वाद एवं साध्वीश्री जी की प्रेरणा से चल रही इस तपस्या की सराहना की। ठाणे से विनोद कोठारी एवं विले पार्ले से रेखा कोठारी ने तपस्वियों की अनुमोदना करते हुए उनके तप के प्रति श्रद्धा एवं शुभकामनाएँ व्यक्त कीं। इसी क्रम में सभी साध्वीयों ने स्वरचित अत्यंत सुमधुर एवं भावपूर्ण गीत का संगान तपस्वियों की अनुमोदना के लिए किया,जिसने पूरे वातावरण को श्रद्धा एवं भक्ति के भावों से भर दिया। साध्वी राकेश कुमारी जी ने प्रेरणा देते हुए तपस्या के आध्यात्मिक महत्व को बताया। तप कर्मों की निर्जरा का प्रभावी माध्यम है। तप से आत्मा की उज्ज्वलता बढ़ती है, कर्मों का क्षय होता है और भावों की शुद्धि होती है। विले पार्ले के जैन संस्कारक गंभीरमल डागलिया एवं जैन संस्कारक जसराज राठौड़ ने कार्यशाला का संयोजन किया।