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तपोमय राखी बंधाइये–रक्षाबंधन मनाइये
आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या डॉ. साध्वी परमयशाजी के सानिध्य में 'रिश्ते नहीं हैं सस्ते (रक्षा-बंधन कार्यशाला)' का समायोजन हुआ। डॉ. साध्वी परमयशाजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में कई पर्व-त्यौहार आते हैं। रक्षाबंधन राखी का उत्सव है। जीवन एक भव्य राजमहल की तरह है जिसमें कई किरदार एक साथ हंसी-खुशी, आमोद-प्रमोद से रहते हैं। M.B.B.S (मां, बहू, बेटी, सास) की Degree के साथ परिवार में खुशहाली रहे। Five T का Good secret जिंदगी की Dictionary में Add करें। Talk, Trust, Target, Tolerance, Thanks को हमेशा साथ रखें। रिश्ते जूते-चप्पल ज्यों न बदलें, पुराने कपड़े ज्यों भी न बदलें। जीवन में ज्यादा रिश्ते होना जरूरी नहीं है पर जो रिश्ते हैं उनमें जीवन का माधुर्य, गांभीर्य होना जरूरी है। जीवन CALENDER ज्यों कभी न हो जिसे हर साल change किया जा सके। रिश्ते मिलते हैं मुकद्दर से – बस उसे खूबसूरती से निभाना सीखो। सोच को बदलो, सितारे बदल जाएंगे। गुनगुनाते हुए जीएं, मुरझाते हुए न जीएं। वाह क्या कमाल! के साथ आगे बढ़ें, आह! ओह! कभी न करें। रिश्तों में 36 का आंकड़ा कभी न आए, प्रत्युत 63 का अंक अपनाएं। तर्क-वितर्क और तकरार को दूर भगाएं। रिश्तों में Caring, Sharing, Healing, Nature रहे। बात को Let Go करना सीखें। किसी बात को प्रतिष्ठा का सवाल न बनाएं। Oxygen ग्रहण की क्षमता बढ़ाएं। डॉ. साध्वी परमयशाजी, साध्वी विनम्रयशाजी, साध्वी मुक्ताप्रभाजी और साध्वी कुमुदप्रभाजी ने 'स्नेहिल स्पंदन, पुलकित जीवन है रक्षाबंधन है॥'