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आत्मरक्षा ही सच्चा रक्षाबंधन
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्रीजी ठाणा-6 के पावन सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद, चेंबूर के तत्वावधान में 'रक्षाबंधन कार्यशाला' का भव्य आयोजन तेरापंथ भवन, चेंबूर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य रक्षाबंधन पर्व को जैन संस्कार विधि के माध्यम से आध्यात्मिक दृष्टिकोण के साथ मनाने की प्रेरणा देना था। संस्कारक मालचंद भंसाली ने जैन संस्कार विधि के अनुसार रक्षाबंधन संस्कार का प्रशिक्षण प्रदान करते हुए बताया कि किस प्रकार व्यवस्थित विधि-विधान, मंगल मंत्रोच्चार एवं आध्यात्मिक भावनाओं के साथ राखी बांधी जानी चाहिए। साध्वी निर्वाणश्रीजी ने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व भले ही लौकिक हो, किंतु आत्मरक्षा का चिंतन पूर्णतः आध्यात्मिक है। आत्मा की रक्षा, पुष्टि एवं तुष्टि के लिए हमें नए दृष्टिकोण से राखी बांधनी चाहिए। ज्ञान का प्रकाश, अज्ञान का समूल नाश तथा राग-द्वेष के क्षय के पश्चात ही आत्मा अपने अविचल स्वरूप को प्राप्त करती है। रक्षाबंधन हमें बाह्य सुरक्षा के साथ-साथ आत्मिक सुरक्षा की भी प्रेरणा देता है। साध्वीश्री ने सर्वेन्द्रिय संयम का विशेष प्रयोग भी करवाया। प्रबुद्ध साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभाजी ने अपने विशेष वक्तव्य में आत्मरक्षा के विविध आध्यात्मिक उपायों की सारगर्भित प्रस्तुति दी तथा आत्मरक्षा एवं गृह-रक्षा कवच से संबंधित विशेष मंत्र-जाप के प्रयोग करवाए। कार्यक्रम की विशेष आकर्षक प्रस्तुति में साध्वी योगक्षेमप्रभाजी, साध्वी लावण्यप्रभाजी, साध्वी कुंदनयशाजी,साध्वी मुदितप्रभाजी एवं साध्वी मधुरप्रभाजी ने रक्षाबंधन विषयक भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया। साध्वीवृंद द्वारा तैयार की गई मनमोहक नौ प्रकार की राखियाँ सभी भाई-बहनों को भेंट की गईं, साध्वीश्रीजी की प्रेरणा से उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने रक्षाबंधन के अवसर पर 'त्याग की राखी' बांधते हुए आध्यात्मिक भेंट अर्पित की। लगभग 150 से अधिक भाई-बहनों ने त्याग का संकल्प लेकर त्याग की राखी बांधी, जो कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। तेयुप चेंबूर के अध्यक्ष हिमांशु गन्ना एवं मंत्री कपिल मेहता ने कार्यक्रम के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई।