संस्थाएं
जैन सिद्धांतों से सौहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण संभव
समण संस्कृति संकाय - जैन विश्व भारती लाडनूं और श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा जयपुर के तत्त्वाधान में अणुविभा केन्द्र मालवीय नगर, जयपुर में 'जैन विद्या कार्यशाला' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित गरीमामय कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुनि तत्त्व रूचि जी 'तरुण' ने कहा - आज अशांत विश्व को शांति की जरूरत है। जैन विद्या के विस्तार से विश्व में अहिंसा और शांति की स्थापना संभव है। उन्होने अहिंसा, अपरिग्रह, अनेकान्तवाद, सम्यग् दर्शन, कर्मवाद आदि जैन सिद्धान्तों की चर्चा भी की। मुनि संभव कुमार जी ने नमस्कार महामंत्र पर आधारित गीत का संगान कर उसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होने कहा- मंत्र की सिद्धि श्रद्धा-आस्था से होती है। राष्ट्रीय मीडिया सहप्रभारी सुमित नाहर ने बताया की कार्यक्रम में समण संस्कृति संकाय के विभागाध्यक्ष मालचन्द बेगानी ने कार्यक्रम की विधिवत आरम्भ की घोषणा की एवं सभी का स्वागत करते हुए समण संस्कृति संकाय द्वारा करणीय कार्यों की जानकारी दी व ज्यादा से ज्यादा इसके आयोजनों को समाज तक पहुंचाने एवं सभी कार्यक्रम मे ज्यादा से ज्यादा सहभागिता हेतु आह्वान किया। सह विभागाध्यक्ष हनुमानमल लूंकड़ ने अपने उद्बोधन मे कहा की आज की नई पीढ़ी को और किशोरो को ज्यादा से ज्यादा इससे जोड़े एवं आज का जो माहौल हम देश मे देख रहे है उस हिसाब से युवाओं मे संस्कार और सकारात्मक हेतु जैन विद्या जैसे आयामों से जोड़ने की अति आवशकता है जिससे सौहार्द पूर्ण वातावरण का निर्माण किया जा सके एवं genG मे संस्कारो का संचार हो और समाज के प्रति उनका जुड़ाव और जागरूकता बनी रहे। चेन्नई से समागत राकेश खटेड़ ने सभी आयामों के फायदे और किस तरह से अपने जीवन का विकास कर सके उसके बारे मे जानकारी दी।