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बचपन के संस्कार पचपन तक काम करेंगे
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या शासन श्री साध्वी सुमनश्रीजी के सान्निध्य में ज्ञानशाला-दिवस का कार्यक्रम उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। दिल्ली ज्ञानशाला की सहसंयोजिका प्रतिभा चोरडिया ने दिल्ली में चल रही 13 ज्ञानशालाओं की जानकारी दी। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा रोहिणी, दिल्ली के अध्यक्ष संजीव जैन ने सभी पदाधिकारियों का स्वागत करते हुए अपने विचारों की प्रस्तुति दी। इसके साथ जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा दिल्ली के महामंत्री प्रदीप संचेती ने तेरापंथ सभा दिल्ली के तत्त्वाधान में चल रही ज्ञानशालाओं के बारे में बोलते हुए प्रशिक्षिकाओं के श्रम की सराहना की और बताया कि हमारी प्रशिक्षिकाएं कितना श्रम कर रही है व्यस्तता में भी अपना समय दे रही है और साध्वी श्री जी की अथक प्रेरणा रहती है। अतः सभी परिवार अपने अपने बच्चों को ज्ञानशाला में आने के लिए प्रेरित करें और ज्ञानार्थियों की संख्या बढ़ायें। 'शासनश्री' साध्वी सुमन श्री जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन के दौरान कहा कि बच्चे राष्ट्र समाज के उज्ज्वल भविष्य हैं। परिवार के कुलदीपक है दीपक से तभी प्रकाश मिलेगा जब उसे वात्सल्य का स्नेह और अनुशासन की बाती मिलेगी तबी दीया जलेगा बच्चों का जीवन कोरा कागज है जैसा चित्र उकेरा जायेगा सद्संस्कारों का रंग भरा जायेगा वैसा ही सुन्दर चित्र उभरेगा। बचपन के संस्कार पचपन तक काम करेंगे। मुहर लगे सिक्के का महत्व है बिना मुहर-छाप लगा सिक्का बेकार है। सद्संस्कारों की मुहर ज्ञानशाला है यहाँ से निकले बच्चों की अलग पहचान होती है। आचार्य श्री तुलसी का यह अवदान समाज के लिए भावी पीढी के निर्माण के लिए वरदान है संस्कारशाला है। ज्ञानशाला में ज्ञानार्थीयों की संख्या बढ़े इसके लिए अभिभावक भी सजग रहे अपना दायित्व निभाएं। साध्वी मधुर लताजी ने 'संस्कार फलते हैं ये, दीप जलते हैं' मधुर गीत से सबको प्रेरणा दी। ज्ञानशाला संरक्षक उपासक रत्नलाल जैन, दिल्ली तेरापंथ युवक परिषद दिल्ली के अध्यक्ष मनीष महणोत ने सामयिक विचारों की प्रस्तुति दी। संचालन रोहिणी ज्ञानशाला की मुख्य प्रशिक्षिका सोनम जैन ने किया।