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अध्यात्म मंत्र शक्ति से ग्रह-दशा पर विजय पा सकते हैं
तुलसी साधना केन्द्र में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की आज्ञानुवर्ती शासनश्री साध्वी मंजुप्रभाजी के सान्निध्य में "नवग्रह शांति अनुष्ठान" करवाया गया। साध्वी मंजुप्रभाजी ने कहा- संसार के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में ग्रह- महाग्रह की दशा- महादशा का आक्रमण होता है, इस आक्रमण पर हम अध्यात्म मंत्र शक्ति के द्वारा विजय प्राप्त कर सकते है। हमारी जैन साधना पद्धति में आत्मा की उपासना, आत्म शक्ति जागरण के अनेक आयाम, प्रयोग है। उनमें एक है" 24 तीर्थकर अनुष्ठान" इस महान् अनुष्ठान का प्रयोग करके प्रत्येक व्यक्ति ग्रह-महाग्रह की दशा को शांत कर आनंदमय जीवन जी सकता है।
साध्वी गुरुयशाजी ने ज्योतिष शास्त्र विज्ञान के आधार पर बताया कि शास्त्रों में 12 राशि बताई गई है। और 9 ग्रह बताये गए हैं , लेकिन मुख्य सात ग्रह होते है दो छाया ग्रह होते है। ये नवग्रह मानव जीवन पर अपना-२ प्रभाव दिखाते है। शुभ घरों में जाने वाले ग्रहों का फल शुभ मिलता है और अशुभ स्थानों पर जाने वाले ग्रहों का फल अशुभ होता है। लेकिन हम ज्योतिष आदि के चक्कर में न जाकर हमारे धर्मगुरुओं द्वारा, धर्माचार्यों द्वार जो मंत्र दिये गए हैं उनकी साधना, ध्यान,जाप करके बाह्य समस्याओं से निजात पा सकते है। जब ये मंत्र सामुहिक अनुष्ठान का रूप ले लेते है तो हमारी शक्ति शत गुणित हो जाती है। और उस शक्ति का स्वरूप हमारे जीवन का कायाकल्प करदेता है। तीर्थकर स्तुति जप, पंचपरमेष्ठी जप, ऊर्जा का अक्षय स्रोत है। इनकी आराधना साधना से हम शक्ति के महापुंज बन सकते हैं। ये ऐसे महान् यज्ञ, अनुष्ठान है जो हमारे जीवन में खुशहाली की बहार, रिश्तों में मधुरता, समरसता भर देते हैं व नकारात्मक शक्तियों से हमारी सुरक्षा करते है।