रचनाएं
मुनि महावीर : तेरापंथ के भावी कर्णधार
एक बच्चे ने गुब्बारे बेचने वाले से पूछा- 'अंकल, जिस तरह से आपके लाल, पीले, हरे और नीले रंग के गुब्बारे आसमान की ऊँचाइयों को छूते हैं, क्या उसी तरह से काले रंग के गुब्बारे भी आसमान का स्पर्श कर सकते हैं?' प्रश्न पूछने वाला लड़का काले रंग का था और उसके कपड़े भी मैले-कुचैले थे। गुब्बारे बेचने वाले ने बच्चे के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा- 'बेटा, जीवन में सदा याद रखना कि गुब्बारा अपने रंग के कारण नहीं, बल्कि उसमें भरी जाने वाली गैस और उसकी विशेषताओं के कारण ही आसमान की ऊँचाइयों को प्राप्त करता है। मुनि महावीर ने अपने जीवन-रूपी गुब्बारे में श्रेष्ठ सद्गुणों और सिद्धांतों का संचार किया। महान उद्देश्यों, महान विचारों और महान संस्कारों के कारण ही उन्होंने आज सफलता की ऊँचाइयों को स्पर्श किया है, फलतः गुरुदृष्टि उन पर टिकी।
–कौन जानता था - फलसुंड जैसे छोटे-से गाँव में जन्मा बालक संघ का भावी कर्णधार बनेगा।
–कौन जानता था - कोचर कुल का कुलदीपक तेरापंथ का ध्रुवतारा बनकर चमकेगा।
–कौन जानता था - सिवांची-मालाणी का गौरव गुरुवर के मन
को भाएगा।
–कौन जानता था - माता छगनीबाई और पिता सवाईसिंहजी का लाल तेरापंथ का भावी गणपाल बनेगा।
–कौन जानता था - युगप्रधान आचार्य श्री महाप्रज्ञजी के मुख-कमल से बाल्यावस्था में जैन-भागवती दीक्षा स्वीकार कर नाम रोशन करेगा।
–कौन जानता था - मुनि महावीर तेरापंथ के सरताज द्वारा श्रेष्ठ 'श्रुत-आराधक' अलंकरण से अलंकृत होंगे।
–कौन जानता था - सहज, सरल एवं सादगीपूर्ण जीवन वाला 'बहुश्रुत-परिषद' का संयोजक बनेगा।
–कौन जानता था - डॉक्टर मुनि महावीर स्वाध्याय, सेवा और समर्पण में अग्रणी बनेंगे।
–कौन जानता था - मेरे सह-दीक्षित मुख्यमुनि महावीर, तेरापंथ के नवम् अधिशास्ता गुरुदेव श्री तुलसी की जन्मभूमि 'लाडनूँ' (चंदेरी) में नवम् युवाचार्य-पद को सुशोभित करेंगे।
– कौन जानता था – योगक्षेम वर्ष, तेरापंथ की राजधानी एवं आचार्य भिक्षु की त्रिजन्मशताब्दी सम्पन्नता समारोह में यह अद्भुत अनुपमेय एवं अनिर्वचनीय दृश्य निहारने का सुअवसर प्राप्त होगा।
– कौन जानता था – तेरापंथ के एकादशम् अधिशास्ता महातपस्वी युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सक्षम उत्तराधिकारी मुनि महावीर बनेंगे। हमें नाज है ऐसे तेजस्वी, वर्चस्वी, मनस्वी, यशस्वी युवराज पर, आप निरामयता, चिरायुषता का वरण करें। गुरुदेव की छत्रछाया में संघ को निरंतर आसमानी ऊंचाइयाँ प्रदान करते रहें। वीर-गोयम-सी अनुपम-जोड़ी हम युग-युग निहारते रहें। उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना। 'शुभं भूयात्', 'कल्याणं भूयात्', 'शिवास्ते पन्थानः'