तप से मन का कायाकल्प हो जाता है

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रोहिणी, दिल्ली।

तप से मन का कायाकल्प हो जाता है

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या शासनश्री साध्वी सुमनश्री जी के सान्निध्य में तपस्विनी बहिन सूंदर देवी मणोत एवं सोनम जैन का तप अनुमोदन समारोह मनाया गया। शासन श्री ने तपस्विनी सोनम जैन को नौ की तपस्या का प्रत्यारख्यान कराते हुए कहा कि तप बहुत छोटा सा शब्द है किन्तु इसमें बह बड़ी शक्तियां समाहित है। तप के द्वारा तन का शोधन होता है तो मन का कायाकल्प हो जाता है। इससे तेजस शरीर जाग जाता है ओर कार्मण शरीर क्षीण हो जाता है। इस रसनेन्द्रिय पर कंट्रोल रखना बहुत बड़ी साधना है जिसका संकल्प मजबूत होता है मन पर पूरा संयम होता है और साथ-साथ में परिवार का सहयोग रहता है। वो ही व्यक्ति तप के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है। आज सोनम जैन का सपना पूरा हो रहा है इस उम्र में तप में शक्ति लगाना युवापीढी और बहिनों के लिए एक प्रेरणा है सुन्दर देवी की भी तपस्या में रुचि है। साध्वी मधुर लता ने 'तप चैतना जगाये आओ मिल सारे' सुमधुर गीत से सबको प्रेरणा दी। रोहिणी सभा के महामन्त्री पराग जैन, तेरापन्थ युवक परिषद दिल्ली के अध्यक्ष मनीष महनोत उत्तरी महिला मण्डल अध्यक्ष इंद्रा सुराणा विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन पराग जैन ने किया।