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तप आत्मशुद्धि एवं कर्मनिर्जरा का श्रेष्ठ मार्ग है
तेरापंथ सभा भवन, गांधीनगर, बेंगलुरु में साध्वी पावनप्रभाजी के सान्निध्य में तेरहरंगी तप अनुष्ठान का भव्य आयोजन श्रद्धा,आध्यात्मिकता एवं तप अनुमोदना के वातावरण में संपन्न हुआ। सभा अध्यक्ष प्रकाशचंद बाबेल ने स्वागत एवं अध्यक्षीय वक्तव्य प्रस्तुत किया। युवक परिषद अध्यक्ष विनोद कोठारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए तपस्वियों के प्रति अनुमोदना एवं शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
इस अवसर पर 'ॐ अ.भि.रा.शि. को नमः' मंत्र का सवा लाख जप अनुष्ठान करवाया गया, जिसमें लगभग 525 व्यक्तियों ने सहभागिता की। साध्वी रम्यप्रभाजी की 13 की तपस्या के उपलक्ष्य में उनके पिता सुंदरलाल बोथरा एवं माताश्री ने भावपूर्ण गीतिका प्रस्तुत की। साध्वी पावनप्रभाजी एवं साध्वीवृंद ने भी तपस्या की अनुमोदना में गीतिका प्रस्तुत की—
'रिमझिम सावन का यह मौसम आया,
साध्वी रम्यप्रभाजी ने तप को महकाया।'
कार्यक्रम संयोजक जितेंद्र घोषल ने तेरहरंगी तप की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।
साध्वी पावन प्रभाजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि तप आत्मशुद्धि एवं कर्मनिर्जरा का श्रेष्ठ मार्ग है। जिस प्रकार सोना अग्नि में तपकर कुंदन बनता है, उसी प्रकार तपस्या के माध्यम से आत्मा कर्मों की निर्जरा कर अधिक निर्मल एवं उज्ज्वल बनती है। उन्होंने कहा कि आज तेरहरंगी तप अनुष्ठान का यह दिव्य एवं मनोहारी दृश्य अत्यंत प्रेरणादायी है। इससे तपस्या के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है तथा भैक्षव शासन एवं नंदनवन की प्रभावना होती है।
साध्वीवृंद के अथक श्रम एवं सहयोग की भी उन्होंने सराहना की। साध्वी आत्मयशाजी एवं साध्वी उन्नतयशाजी ने भी तपस्वियों की तपस्या के प्रति अनुमोदना व्यक्त की। साध्वी रम्यप्रभाजी ने भी तेरह की तपस्या के माध्यम से कर्मनिर्जरा की साधना की।
साथ ही मुनि विनीत कुमारजी, मुनि आकाश कुमारजी, साध्वी सिद्धप्रभाजी एवं साध्वी पुण्ययशाजी के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की गई। कहा गया कि इस आयोजन की सफलता में अनेक व्यक्तियों का श्रम, आशीर्वाद एवं मंगलभाव जुड़ा हुआ है। कार्यक्रम का सफल संचालन सभा मंत्री सुभाष पोखरणा ने किया।