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संस्कारों की जननी है ज्ञानशाला मंत्र दीक्षा कार्यक्रम सम्पन्न
सेलम। साध्वी संयमलताजी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में भौतिकता की चकाचौंध में हमारी संस्कृति के मूल संस्कार लुप्त होते जा रहे हैं। ऐसे संस्कार चाहिए जो बचपन से ही जीवन का मार्गदर्शन करें और उनका श्रेष्ठ माध्यम है णमोकार महामंत्र। जिसके द्वारा हमारी आत्मा धन्य होती है। इस अवसर पर उन्होंने आचार्य श्री तुलसी के इस प्रेरक कथन का उल्लेख करते हुए कहा— 'संस्कारों की जननी है ज्ञानशाला, सुखी जीवन की विधायिका है ज्ञानशाला।' उन्होंने बताया कि ज्ञानशाला बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण करती है और मंत्र दीक्षा के माध्यम से उनके जीवन में नैतिकता, संयम एवं आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है। साध्वीश्री ने बच्चों को नशामुक्त रहने, मांसाहार, अंडा आदि का त्याग करने की प्रेरणा देते हुए मंत्र दीक्षा का संकल्प कराया।