परिवार साथ रहने का नहीं, एक-दूसरे को समझने का नाम है

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केसिंगा।

परिवार साथ रहने का नहीं, एक-दूसरे को समझने का नाम है

स्थानीय तेरापंथ भवन, केसिंगा में युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि हिमांशु कुमार जी एवं मुनि हेमंत कुमार जी के पावन सान्निध्य में 'New Zen Sibling Workshop – साथ है तो बात है' का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी में भाई-बहन एवं भाई-भाई, बहन-बहन जैसे पारिवारिक रिश्तों में बढ़ती दूरियों के कारणों को समझना तथा आपसी संवाद, सहयोग और भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम से रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर चिंतन करना था।
कार्यशाला में लगभग 35 भाई-बहन के जोड़ों सहित एवं तीन-तीन प्रतिभागियों के समूहों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यशाला का शुभारंभ मुनि हिमांशु कुमार जी के मंगल उद्बोधन से हुआ। उन्होंने रिश्तों में संवाद एवं आत्मीयता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि परिवार केवल साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझने, सुनने और साथ देने का भाव है। वर्तमान समय में तकनीक और व्यस्त जीवनशैली ने जहां जीवन को सुविधाजनक बनाया है, वहीं कहीं न कहीं अपनों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को भी प्रभावित किया है। ऐसे में रिश्तों को जीवंत बनाए रखने के लिए समय देना और एक-दूसरे की भावनाओं को समझना अत्यंत आवश्यक है।
इसके पश्चात मुनि हेमंत कुमार जी ने पूरे वर्कशॉप का प्रभावी नेतृत्व करते हुए प्रतिभागियों को विभिन्न संवादात्मक गतिविधियों एवं रोचक अभ्यासों के माध्यम से विषय से जोड़ा। उन्होंने सहज और व्यावहारिक तरीके से यह समझाने का प्रयास किया कि आज की नई पीढ़ी में रिश्तों के बीच दूरी केवल भौतिक रूप से नहीं, बल्कि कम्युनिकेशन गैप, अपेक्षाओं, गलतफहमियों, व्यस्तता और एक-दूसरे को पर्याप्त समय न देने के कारण भी बढ़ रही है।