ज्ञानशाला जीवन का एक मंगलमय कलश है

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उधना।

ज्ञानशाला जीवन का एक मंगलमय कलश है

आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या डॉ. साध्वी परमयशाजी के सान्निध्य में 'संस्कारों के जागरण की शाला' के कार्यक्रम का समायोजन हुआ। डॉ. साध्वी परमयशाजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। संघ का गौरव हैं। परिवार की गरिमा हैं। बालक भगवान के देवदूत हैं। संस्कार किसी Mall में नहीं, Market में नहीं, परिवार के माहौल में मिलते हैं। संस्कार निर्माण की पहली unit है परिवार। संस्कार संपन्न बनने की दूसरी unit है ज्ञानशाला। जहाँ बच्चे Zero से Hero बन जाते हैं। मन के मालिक बन जाते हैं। खुद के भाग्य विधाता बन जाते हैं। बच्चों का संस्कारी बनाना देश के संचालन से ज्यादा महत्वपूर्ण है। एक श्रेष्ठ बालक का निर्माण सौ स्कूल से बेहतर है। प्राचीन समय में दादी नानी की कहानियां लोरियाँ से बच्चे नैतिक मूल्यों का प्रशिक्षण प्राप्त करते थे, जिस घर के बच्चे संस्कारी वह घर माता का आभारी। मां एक टीचर एक गाइड एक डायटीशियन बनकर संस्कार देती हैं। डॉ. साध्वी परमयशाजी, साध्वी विनम्रयशाजी, साध्वी मुक्ताप्रभाजी और साध्वी कुमुदप्रभाजी ने 'Bright Present Bright Future ज्ञानशाला सिखलाए' गीत का संगान किया। ज्ञानशाला दिवस पर तेरापंथ समाजाध्यक्ष नेमीचंद पोरवाड़ ने सबका स्वागत किया। ज्ञानशाला प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक सोहनलाल चोपड़ा, गुजरात के आंचलिक संयोजका मनीता चोपड़ा, Joint Commissioner of Police सूरत सजन सिंह परमार, प्रवीण मेड़तवाल, मुख्य प्रशिक्षिका उधना की ऊषा डांगी आदि सभी ने ज्ञानशाला दिवस के उपलक्ष्य में भावों की अभिव्यक्ति दी। ज्ञानशाला दिवस पर उधना, पांडेसरा, लिम्बायत, भेस्तान और सचिन ने बहुत ही Beautiful, wonderful and the Best Performance प्रस्तुत किए।कार्यक्रम का संयोजन ज्ञानशाला की प्रशिक्षिका पुष्पा चपलोत और सरोज बाबेल ने किया और आभार ज्ञापन मनिषा कोठारी ने किया।