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जीवन निर्माण की पाठशाला है ज्ञानशाला
मुनि प्रशांत कुमारजी, मुनि कुमुद कुमारजी के सान्निध्य में ज्ञानशाला दिवस(ज्ञानशाला संस्कारों के जागरण की शाला) का कटिहार में आयोजन हुआ। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनि प्रशांत कुमार जी ने कहा- ज्ञानार्थीयों की प्रेरक संदेश देने वाली प्रस्तुती देखी। ज्ञानशाला के प्रति आकर्षण अपने आप में सुखद संकेत है।जो ज्ञानशाला आते है उन्हें चिंतन करना चाहिए कि कैसे अच्छा जीवन जिएं। कैसे परिवार के साथ रहें। ज्ञानशाला में जीवन का निर्माण होता है।
माता-पिता जागरुक होंगे तो बच्चों का भविष्य अच्छा रहेगा। ज्ञानशाला जीवन निर्माण की पाठशाला है। अच्छी बातें, अच्छी आदतें सीखने का माध्यम है ज्ञानशाला। घर का माहौल, धार्मिक वातावरण जैसा होता है बच्चे वैसा ही सीखते है। बच्चे हर बात को शीघ्र ग्रहण करते है।
घर के सदस्यों का व्यवहार ऐसा हो कि बच्चे अच्छी बातें सीख सकें। परिवार में भाषा कैसी होनी चाहिए जिससे बच्चे सम्यक तत्व को सीख पाए। बच्चों को संस्कारित करने के लिए अभिभावकों को अपना जीवन संस्कारवान बनाना चाहिए। अच्छी बातें सुनने से अच्छा ग्रहण कर पाते है। हमारा मन भी अच्छी खुराक को ग्रहण करें ये प्रयास होना चाहिए। अच्छी प्रेरणा को ग्रहण करने का प्रयास करेंगे तो हमारा जीवन एक आदर्श जीवन होगा। बहुत साधुवाद के पात्र है ज्ञानशाला की प्रशिक्षक जो अपने समय,अपनी शक्ति का नियोजन ज्ञानार्थी के जीवन निर्माण में कर रही है। मुनि कुमुद कुमार जी ने कहा - गुरुदेव श्री तुलसी की महान देन है ज्ञानशाला। ज्ञानशाला व्यक्तित्व निर्माण की प्रयोगशाला है।
जीवन में जैनत्व, श्रावकत्व के संस्कार बहुत जरूरी है।जो संस्कार बचपन में मिलते है वो ताउम्र काम करते है। बचपन नींव का काम करता है।नींव मजबूत होने से ही भविष्य स्थायी रुप से सुरक्षित रह पाता है। वर्तमान समय में शिक्षा का महत्व बढ़ा है ऐसे में सम्यक संस्कार बहुत ज्यादा अपेक्षित है।
सभा मंत्री राजकुमार पुगलिया, महासभा बिहार झारखंड आंचलिक प्रभारी राजेश पटावरी, नेपाल बिहार सभा अध्यक्ष विरेंद्र संचेती ने विचारों की अभिव्यक्ति दी। ज्ञानशाला संयोजिका शांति नाहटा ने ज्ञानशाला का इतिहास प्रस्तुत किया।आभार हनुमान नाहटा ने किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन संयोजिका निशा पटावरी ने किया।