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रक्षाबंधन प्रेम, विश्वास और त्याग को मजबूत करने का अवसर
मुनि अभिजीत कुमार जी ने रक्षाबंधन पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि यह पर्व केवल भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, त्याग एवं संस्कारों को मजबूत करने का अवसर है। मुनिश्री जागृत कुमार जी ने रक्षाबंधन के अवसर पर प्रेरणा प्रदान करते हुए फरमाया कि सच्ची रक्षा केवल कलाई पर रक्षासूत्र बाँधने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे के जीवन में अच्छे संस्कार, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना जगाने से होती है। उपासक व संस्कारक मनीष छलाणी, संस्कारक प्रकाश सुराणा, हेमराज राखेचा व महेन्द्र कुमार श्यामसुखा ने पूरे विधि-विधान व मंगल मंत्रोच्चार के साथ कार्यशाला को संपादित किया। कार्यशाला का शुभारंभ सामूहिक नमस्कार महामंत्र के उच्चारण के साथ किया गया। स्वागत वक्तव्य तेयुप अध्यक्ष प्रकाश सुराणा ने पधारे हुए सभी महानुभावों का स्वागत किया। संचालन संस्कारक हेमराज राखेचा एवं महेन्द्र कुमार श्यामसुखा द्वारा किया गया। रक्षाबंधन अनुष्ठान संस्कारकों के निर्देशानुसार सभी बहनों ने अत्यंत आध्यात्मिक वातावरण में अपने भाइयों का तिलक कर कलाई पर रक्षासूत्र बाँधा मंच संचालन व आभार ज्ञापन प्रभारी हितेश दुगड़ ने किया।