रक्षा सूत्र बंधन की विधि और धार्मिक महत्व

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अहमदाबाद पूर्व।

रक्षा सूत्र बंधन की विधि और धार्मिक महत्व

अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के जैन संस्कार विधि के मुख्य प्रशिक्षक एवं उपासक प्राध्यापक डालिमचंद नवलखा कार्यशाला का संचालन करते हुए जैन संस्कार विधि से रक्षा सूत्र बांधने की विधि, उसके महत्व और धार्मिक भावना से जुड़े सत्कर्मों की विस्तृत जानकारी देते हुए आवश्यक सामग्री कि जानकारी प्रदान की। दोनों संस्कारकों ने मंगल मंत्रोच्चारण के साथ तिलक वर्धापन करवाते हुए रक्षा सूत्र (राखी) बांधने की विधि सम्पन्न करवाई। कार्यक्रम में सहभागित सभी जोड़ो द्वारा मंगल भावना यंत्र कि स्थापना करवाते हुए मंगल भावना मंत्रों का सामूहिक उच्चारण किया गया।
विविध मंत्रोच्चारण के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए संस्कारको ने सभी को आशीर्वाद रूपी मंत्र सुनाये। वीरेंद्र मणोत ने उपस्थित सभी को जैन संस्कार विधि से जन्मोत्सव, तप सम्पूर्ति जैसे कार्यक्रम जैन संस्कार विधि से मनाने की प्रेरणा दी। 25 भाई-बहनों की जोड़ी से समायोजित इस कार्यशाला में कांकरिया सभा के उपाध्यक्ष अशोक दुगड़, परिषद् से सहमंत्री संदीप बरडीया सहित श्रावक-श्राविकाओं की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही। हितेष लुणिया ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के संयोजक गौरव भंसाली एवं संदीप बरडिया का विशेष सहयोग रहा।