एक आचार्य का त्रिवेणी संगम है : तेरापंथ

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सिकंदराबाद।

एक आचार्य का त्रिवेणी संगम है : तेरापंथ

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि दीप कुमारजी एवं सहवर्ती संत मुनि काव्य कुमारजी के सानिध्य में कार्यक्रम संपादित किया गया।। अपने प्रेरक प्रवचन में मुनि दीप कुमारजी ने कहा कि– एक आचार, एक विचार, एक आचार्य का त्रिवेणी संगम है तेरापंथ 'तेरापंथ केवल एक धर्मसंघ नहीं, बल्कि अनुशासन, मर्यादा, संगठन और संस्कार की जीवंत परंपरा है।
आचार्य भिक्षु द्वारा स्थापित यह संघ आज 267 वर्षों बाद भी अपने मूल सिद्धांतों पर अडिग रहकर समाज को नैतिकता, संयम और सदाचार का संदेश दे रहा है। प्रत्येक तेरापंथी का दायित्व है कि वह संघ की गौरवशाली विरासत को अपने जीवन में उतारे।' मुनिश्री ने आगे कहा कि वर्तमान समय में यदि मानव अपने जीवन में संयम, अनुशासन और आत्मचिंतन को स्थान दे, तो अनेक समस्याओं का समाधान स्वतः हो सकता है। इस अवसर पर हम सब धर्म संघ की सेवा का संकल्प ले, यही 267वें तेरापंथ स्थापना दिवस की मनाने की सार्थकता है। मुनि काव्य कुमारजी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि 'तेरापंथ की स्थापना केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा का स्रोत है। युवा पीढ़ी यदि संघ के आदर्शों, अनुशासन और संस्कारों को अपनाए तो समाज और राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बन सकता है। कार्यक्रम में तेरापंथ धर्मसंघ की स्थापना, उद्देश्य, आदर्श एवं 267 वर्षों की प्रेरणादायी विकास यात्रा पर प्रकाश डाला गया।