आकर्षण से बचें, सन्मार्ग पर दृढ़ रहें

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केसिंगा।

आकर्षण से बचें, सन्मार्ग पर दृढ़ रहें

स्थानीय तेरापंथ भवन, केसिंगा में ‘तेरापंथ फैमिली मीट – उत्कर्ष 2026’ का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन ‘समन्वय – संस्कार – संस्कृति’ की भावभूमि पर संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन उड़ीसा प्रांतीय तेरापंथी सभा एवं श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, केसिंगा के तत्वावधान में, युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के विद्वान शिष्य मुनि हिमांशु कुमार जी एवं मुनि हेमंत कुमार जी के पावन सान्निध्य में हुआ। इस विशेष आयोजन में पश्चिम उड़ीसा के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं एवं तेरापंथी परिवारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। भवानीपटना, उत्केला, टिटलागढ़, सिंधीकेला, बागुंडा, चंदूतारा, कंटाबांजी, नवरंगपुर, बरगढ़, रायगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को व्यापक एवं भव्य स्वरूप प्रदान किया। विभिन्न क्षेत्रों से आए परिवारों के सामूहिक सहभाग ने पारिवारिक एकता, आपसी समन्वय एवं तेरापंथी संस्कारों की जीवंत अभिव्यक्ति को और सुदृढ़ किया। इसके पश्चात मुनि हिमांशु कुमार जी ने अपनी मधुर एवं भावपूर्ण गीत प्रस्तुति से उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिभूत किया। भिक्षु भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत सुंदर गीतिका ने कार्यक्रम में भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक गहन बना दिया। केसिंगा सभा के अध्यक्ष रामकुमार जैन ने अपने स्वागत वक्तव्य में कार्यक्रम की महत्ता एवं गुणवत्ता पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित सभी परिवारों का स्वागत किया। वहीं उड़ीसा प्रांतीय तेरापंथी सभा के अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण ने अपने उद्बोधन में तेरापंथ फैमिली मीट की आवश्यकता, इसकी उपयोगिता तथा इसके माध्यम से परिवार एवं समाज के स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन लाने की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजन परिवारों को एक-दूसरे से जोड़ने के साथ-साथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को जीवन में उतारने का सशक्त माध्यम बनते हैं। मुनि हिमांशु कुमार जी एवं मुनि हेमंत कुमार जी ने अत्यंत सरल, रोचक एवं प्रभावशाली शैली में उपस्थित परिवारों को समझाया कि आध्यात्मिक जीवन की राह को सोच-समझकर संभालना और निरंतर आगे बढ़ाना आवश्यक है। मुनिश्री ने समझाया कि वास्तविक जीवन में अनेक प्रकार की चुनौतियाँ सामने आएंगी। परिस्थितियाँ और आकर्षण व्यक्ति को उसके सन्मार्ग, संस्कारों एवं संस्कृति से दूर करने का प्रयास कर सकते हैं, लेकिन ऐसे समय में व्यक्ति को अपने संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों पर दृढ़ता से टिके रहना चाहिए। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि गंभीर आध्यात्मिक एवं जीवनोपयोगी विषयों को भी अत्यंत रोचक एवं मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत किया गया।
विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से मुनिश्री ने उपस्थित जनसमुदाय को आत्मावलोकन का अवसर दिया और यह समझाने का प्रयास किया कि हम अपने भीतर कितने संस्कार, कितनी जागरूकता और कितनी आध्यात्मिक संपदा लेकर चल रहे हैं तथा अभी जीवन में कितना और अर्जित करना शेष है। उड़ीसा प्रांतीय तेरापंथी सभा के मंत्री केशव नारायण ने आभार ज्ञापन किया।