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भक्तामर है प्रसन्नता का प्रोटीन, इम्यून सिस्टम की बैटरी
डॉ. साध्वी परमयशाजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भक्तामर स्तोत्र एक महाकाव्य है जिसके हर पद पर आध्यात्म की अरुणाई है। हर पैराग्राफ में साधना की सौरभ है। हर श्लोक में दिव्यता भव्यता का स्पंदन है। हर अक्षर में ऋद्धि-सिद्धि का संदेश है।आज का दिन शुभ दिन, अच्छा दिन, शानदार दिन और आश्चर्य से भरा दिन है। जहाँ भक्तामर में आदिनाथ प्रभु लाभ के स्वस्तिक बनाते हैं, तो दूसरी तरफ एक महापुरुष का हैप्पी बर्थडे है, जिसे जन्माष्टमी कहते हैं। वे हैं वासुदेव श्री कृष्ण, जो अरिष्टनेमि प्रभु के कज़िन भ्राता थे। भक्ताम्बर हमें देता है प्रसन्नता का प्रोटीन, सहिष्णुता का सिरप, कार्यकुशलता का कार्बोहाइड्रेट, मृदुता के मिनरल्स, जिनवाणी का रसायन, गुरुकृपा का संजीवन। भक्तामर में लाजवाब है ऑक्सीजन ग्रहण की क्षमता, एंटीबॉडी को स्ट्रॉन्ग करने की ऊर्जा। इम्यून सिस्टम की चार्जिंग बैटरी, डेफिशिएंसी पावर क्षमता। इसके साथ जुड़ा है एक कल्पवृक्ष जिससे पूरी होती है हर मनन्त और मांग। सुपर फास्ट ट्रेन है - भक्ताम्बर, बुलेट ट्रेन ज्यो त्वरित यान है भक्ताम्बर। डॉ. साध्वी परमयशाजी, साध्वी विनम्रयशाजी, साध्वी मुक्ताप्रभा जी और साध्वी कुमुदप्रभा जी ने भक्तामर के 44 श्लोकों का संगान किया और उनकी ऋद्धि और मंत्र भी बताए। तेरापंथ सभा अध्यक्ष नेमीचंद पोरवाड़ ने सबका भक्तामर अनुष्ठान में स्वागत किया। भक्तामर अनुष्ठान में लगभग २११ जोड़ों ने भाग लिया, भक्ताम्बर अनुष्ठान में बसंतीलाल नाहर ने सबका आभार ज्ञापन किया। लगभग ८११ श्रावक-श्राविकाओं ने बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ भक्तामर अनुष्ठान में भाग लिया।